MMDR कानून पर अंबा प्रसाद का केंद्र पर हमला, झारखंड के आर्थिक शोषण का लगाया आरोप
कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने MMDR कानून को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड जैसे राज्यों का आर्थिक शोषण करना चाहती है और राज्य के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है।
प्रमुख बातें
- अंबा प्रसाद ने MMDR कानून को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
- आरोप लगाया कि झारखंड जैसे राज्यों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
- भाजपा शासित राज्यों के कानून का विरोध नहीं करने पर सवाल उठाया।
- केंद्र पर झारखंड के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप।
- हेमंत सोरेन सरकार की ओर से केंद्र से राज्य के बकाये की मांग का जिक्र किया।
MMDR कानून को लेकर केंद्र पर बड़ा हमला
अंबा प्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार MMDR कानून के माध्यम से झारखंड जैसे राज्यों का आर्थिक शोषण करना चाहती है। उनके मुताबिक, झारखंड खनिज संपदा के मामले में देश के महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है, ऐसे में राज्य के आर्थिक हितों और अधिकारों की रक्षा बेहद जरूरी है।
उन्होंने केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि खनिज संपदा वाले राज्यों के अधिकारों और आर्थिक हितों को प्रभावित करने वाले फैसलों का विरोध होना चाहिए।
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भाजपा शासित राज्यों को लेकर भी उठाए सवाल
अंबा प्रसाद ने पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और ओडिशा का उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं और उनके अनुसार इन राज्यों ने MMDR कानून का उस स्तर पर विरोध नहीं किया है, जिस तरह झारखंड कर रहा है।
उन्होंने इस पूरे मामले को राजनीतिक भेदभाव से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए।
‘झारखंड के साथ हो रहा दोयम दर्जे का व्यवहार’
अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार झारखंड के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार लगातार राज्य के बकाये की मांग केंद्र के सामने उठाती रही है, लेकिन इसके बावजूद राज्य के आर्थिक हितों से जुड़े मामलों में पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा है।
उनका कहना है कि राज्य के अधिकारों और संसाधनों को लेकर झारखंड सरकार को लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
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हेमंत सोरेन सरकार के बकाये का भी मुद्दा उठाया
अंबा प्रसाद ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा केंद्र सरकार से राज्य के बकाये की मांग किए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लंबे समय से अपने हिस्से की राशि और बकाये को लेकर केंद्र के समक्ष आवाज उठा रही है।
उनके मुताबिक, एक तरफ राज्य सरकार अपने बकाये की मांग कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे कानून और नीतियां सामने आ रही हैं, जिन्हें वह झारखंड के आर्थिक हितों के लिए चुनौती मानती हैं।
MMDR कानून पर बढ़ सकता है सियासी विवाद
अंबा प्रसाद के इस बयान के बाद MMDR कानून को लेकर झारखंड में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। झारखंड की राजनीति में खनिज संसाधनों, रॉयल्टी, केंद्र-राज्य संबंध और राज्य के आर्थिक अधिकार लगातार महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं।
अब देखना होगा कि अंबा प्रसाद के आरोपों पर केंद्र सरकार या भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। साथ ही, MMDR कानून को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच आगे क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर भी नजर रहेगी।
