भाषा में मर्यादा जरूरी, विरोध में तीखापन हो सकता है लेकिन शालीनता नहीं छूटनी चाहिए: विधानसभा स्पीकर
रांची: झारखंड विधानसभा के स्पीकर रबिंद्र नाथ महतो ने जनप्रतिनिधियों के संवाद और अभिव्यक्ति में भाषा की मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों और विषय कितना भी गंभीर या आक्रामक क्यों न हो, अभिव्यक्ति की गरिमा कम नहीं होनी चाहिए।
स्पीकर की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब हाल के दिनों में डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो और पुलिस के बीच हुई कथित नोकझोंक एवं अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल को लेकर विवाद चर्चा में है। ऐसे में उनके बयान को इसी पूरे घटनाक्रम के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रमुख बातें
विधानसभा स्पीकर ने भाषा में संयम और संवाद में मर्यादा पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि विरोध में तीखापन हो सकता है, लेकिन शालीनता नहीं खोनी चाहिए।
गंभीर परिस्थितियों में भी अभिव्यक्ति की गरिमा बनाए रखने की बात कही।
जयराम कुमार महतो और पुलिस के बीच हालिया विवाद के बीच बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
‘विचारों में दृढ़ता हो, भाषा में शालीनता भी जरूरी’
विधानसभा स्पीकर ने कहा कि विचारों में दृढ़ता और विरोध में तीखापन होना स्वाभाविक है, लेकिन भाषा की शालीनता और संवाद की मर्यादा को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी मुद्दे पर असहमति या विरोध जताते समय भी शब्दों के चयन में संयम बरता जाना चाहिए।
जयराम महतो-पुलिस विवाद के बीच बयान अहम
दरअसल, हाल के दिनों में डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो और पुलिस के बीच हुई नोकझोंक को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हुई है। इस दौरान कथित तौर पर इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर भी सवाल उठे हैं।
ऐसे में विधानसभा स्पीकर का यह कहना कि “विरोध में तीखापन हो, लेकिन भाषा में शालीनता और मर्यादा कभी नहीं खोनी चाहिए”, मौजूदा विवाद के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों के संवाद पर भी सवाल
जनप्रतिनिधि और प्रशासन के बीच किसी भी मुद्दे पर मतभेद होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, ऐसे मामलों में संवाद का स्तर और भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। स्पीकर की टिप्पणी इसी व्यापक संदर्भ में देखी जा रही है।
