JSSC-CGL विवाद पर भाजपा का हमला, प्रशांत कुमार के इस्तीफे की मांग; CBI जांच को लेकर सरकार पर दबाव
JSSC-CGL परीक्षा विवाद को लेकर झारखंड में सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता शोभा यादव ने JSSC के प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार के पद पर बने रहने और परीक्षा सुधार समिति में उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
प्रमुख बातें
- भाजपा ने प्रशांत कुमार को JSSC के प्रभारी अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की।
- सितंबर 2024 में हुई JSSC-CGL परीक्षा उनके कार्यकाल में आयोजित होने का दावा।
- परीक्षा विवाद के बाद रद्द किए जाने को लेकर भाजपा ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
- परीक्षा सुधार समिति में प्रशांत कुमार को शामिल किए जाने का विरोध।
- बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की है।
- भाजपा ने जांच पूरी होने तक प्रशांत कुमार को परीक्षा संबंधी प्रक्रियाओं से दूर रखने की मांग की।
‘छात्रों के साथ अन्याय’, भाजपा ने सरकार को घेरा
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शोभा यादव ने कहा कि JSSC-CGL परीक्षा विवाद के बावजूद प्रशांत कुमार का JSSC के प्रभारी अध्यक्ष पद पर बने रहना छात्रों के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सितंबर 2024 में आयोजित JSSC-CGL परीक्षा उनके कार्यकाल में हुई थी, जिसे बाद में रद्द करना पड़ा।
शोभा यादव के मुताबिक, परीक्षा को रद्द किए जाने की स्थिति ने पूरी परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में उसी अधिकारी को परीक्षा सुधार समिति में शामिल करना, जिनके कार्यकाल में परीक्षा विवाद सामने आया, सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।

बाबूलाल मरांडी ने भी CBI जांच की मांग की
भाजपा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी पहले ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से हटाने की मांग कर चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने JSSC-CGL से जुड़े पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग भी उठाई है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि प्रशांत कुमार के प्रशासनिक कार्यकाल से जुड़े वित्तीय मामलों और जल संसाधन विभाग से संबंधित प्रकरणों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने सरकार से इन आरोपों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

‘जांच पूरी होने तक समिति से दूर रखें’
शोभा यादव ने कहा कि जब लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो चुके हैं, तब प्रशांत कुमार को नैतिक आधार पर तत्काल JSSC के प्रभारी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि जब तक पूरे मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रशांत कुमार को ऐसी किसी भी समिति या प्रक्रिया से दूर रखा जाए, जिसमें उनके कार्यकाल से जुड़े फैसलों की समीक्षा होनी है।
भाजपा का सरकार को सीधा संदेश
भाजपा ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों के हित और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर गंभीर है, तो उसे तत्काल प्रशांत कुमार का इस्तीफा लेना चाहिए। साथ ही JSSC-CGL विवाद की CBI जांच कराकर पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
अब सवाल यह है कि JSSC-CGL विवाद को लेकर भाजपा की लगातार बढ़ती मांगों पर सरकार क्या कदम उठाती है और क्या प्रशांत कुमार के पद को लेकर कोई निर्णय लिया जाता है।
