JTET भाषा विवाद में कांग्रेस के भीतर मतभेद! शिल्पी नेहा विरोध में, राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय समर्थन में
रांची: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने के मुद्दे ने अब नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद में कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आई हैं। एक ओर कांग्रेस कोटे की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की इन भाषाओं को JTET में शामिल किए जाने के खिलाफ हैं, वहीं कांग्रेस के ही दो अन्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय सिंह इसके पक्ष में बताए जा रहे हैं।
एक ही पार्टी के मंत्रियों की अलग-अलग राय सामने आने के बाद विपक्ष को कांग्रेस और सरकार दोनों को घेरने का मौका मिल गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर एकमत नहीं है?
प्रमुख बातें
- JTET में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने पर विवाद।
- कांग्रेस की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने जताया विरोध।
- कांग्रेस के ही राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय सिंह समर्थन में।
- मंत्री समिति की बैठक में नहीं बन सकी सहमति।
- अंतिम फैसला अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के स्तर पर संभव।
कांग्रेस के भीतर क्यों बढ़ी चर्चा?
JTET में भाषाओं को शामिल करने के मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है। मंत्री समिति की बैठक में जहां शिल्पी नेहा तिर्की ने भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने का विरोध किया, वहीं राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय सिंह इन भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में नजर आए।
ऐसे में कांग्रेस के सामने यह चुनौती खड़ी हो गई है कि वह इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट और एकीकृत रुख कैसे पेश करे।
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भाषा विवाद क्यों बना बड़ा मुद्दा?
JTET में भाषा चयन का सीधा संबंध शिक्षक नियुक्ति और लाखों अभ्यर्थियों से जुड़ा हुआ है। समर्थकों का कहना है कि भोजपुरी, मगही और अंगिका बोलने वालों की बड़ी आबादी है, इसलिए उन्हें भी परीक्षा में विकल्प मिलना चाहिए।
वहीं विरोध करने वाले पक्ष का तर्क है कि झारखंड की स्थानीय और जनजातीय भाषाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और राज्य की भाषाई पहचान को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
मंत्री समिति की बैठक में नहीं बनी सहमति
भाषा विवाद को लेकर गठित मंत्री समिति की बैठक में विभिन्न पक्षों ने अपनी राय रखी, लेकिन किसी अंतिम निष्कर्ष पर सहमति नहीं बन सकी। यही वजह है कि अब यह मामला सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंच गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्री समिति के भीतर उभरे मतभेद ने सरकार के लिए भी स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता
JTET की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। परीक्षा में भाषाओं के विकल्प का सीधा असर उम्मीदवारों की तैयारी और अवसरों पर पड़ सकता है। इसलिए इस मुद्दे को लेकर छात्रों और सामाजिक संगठनों में भी बहस जारी है।
अब CM हेमंत सोरेन के फैसले पर निगाहें
मंत्री समिति में सहमति नहीं बनने और कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राय सामने आने के बाद अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय ले सकती है।
आने वाले दिनों में लिया गया फैसला न केवल JTET अभ्यर्थियों को प्रभावित करेगा, बल्कि झारखंड की राजनीति में भी इसकी गूंज सुनाई दे सकती है।
