पुलिस को जनता से बात करने का तरीका सीखना होगा- बाबूलाल मरांडी

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पुलिस की मर्यादा पर बाबूलाल मरांडी के तीखे सवाल, बोले- क्या शिष्टाचार सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए?

रांची: विधानसभा सदस्य और थाना प्रभारी के बीच कथित हॉट-टॉक के बाद पुलिस एसोसिएशन की ओर से सामने आ रहे बयानों के बीच झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पुलिस के व्यवहार और जवाबदेही को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि भाषा, शिष्टाचार और मर्यादा हर व्यक्ति के लिए जरूरी है, लेकिन यह मर्यादा केवल जनप्रतिनिधियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

‘क्या मर्यादा सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए है?’

बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाया कि यदि जनप्रतिनिधि और पुलिसकर्मी के बीच बातचीत में भाषा और शिष्टाचार को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो क्या पुलिस अधिकारियों के व्यवहार पर भी समान रूप से सवाल नहीं होना चाहिए?

उन्होंने पूछा कि क्या पुलिस एसोसिएशन ने कभी कथित तौर पर गाली-गलौज करने वाले किसी दारोगा के व्यवहार की निंदा की है या आम लोगों से अभद्र भाषा में बात करने वाले पुलिसकर्मियों को मर्यादित व्यवहार की नसीहत दी है।

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बातचीत रिकॉर्ड कर वायरल करने पर भी सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने बिना सहमति बातचीत रिकॉर्ड कर उसे सार्वजनिक और वायरल किए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या किसी व्यक्ति की निजी बातचीत को उसकी सहमति के बिना रिकॉर्ड कर सार्वजनिक करना उसकी निजता से जुड़ा गंभीर मामला नहीं है?

मरांडी ने सवाल किया कि निजता और कानून से जुड़े नियम क्या केवल आम लोगों के लिए हैं या पुलिस और सरकारी तंत्र पर भी समान रूप से लागू होते हैं।

चास थाना प्रभारी के कथित ऑडियो का किया जिक्र

बाबूलाल मरांडी ने कुछ महीने पहले बोकारो जिले के चास थाना प्रभारी से जुड़े कथित गाली-गलौज वाले ऑडियो के वायरल होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय उनकी ओर से सरकार से मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई थी।

उनका आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय सरकार ने ऐसे पुलिस अधिकारियों को संरक्षण दिया। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार का पक्ष सामने आना बाकी है।

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‘थानों में आम लोगों से अभद्र व्यवहार की शिकायतें’

मरांडी ने कहा कि थानों में आम जनता के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल, फोन पर गाली-गलौज और दुर्व्यवहार की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं। उनके मुताबिक, यदि आज जनप्रतिनिधियों और पुलिस के बीच भी ऐसी स्थिति पैदा हो रही है, तो इसके लिए राज्य सरकार की नीति और पुलिस अधिकारियों को मिल रहे कथित संरक्षण पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

‘पुलिस को जनता से बात करने का तरीका सीखना होगा’

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि आम नागरिक द्वारा किसी को गाली देना अपराध माना जाता है, तो पुलिसकर्मियों को जनता के साथ अपशब्दों का इस्तेमाल करने का विशेषाधिकार किसने दिया है?

उन्होंने कहा कि पुलिस को सबसे पहले आम जनता से बातचीत करने का तरीका, शिष्टाचार और संवेदनशील व्यवहार सीखना होगा। साथ ही सरकार को ऐसे मामलों में केवल निलंबन तक सीमित रहने के बजाय, जहां कानून के अनुसार अपराध बनता हो, वहां निष्पक्ष जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

मरांडी के मुताबिक, पुलिस और आम जनता के बीच भरोसा तभी मजबूत होगा, जब कानून और मर्यादा का पैमाना सभी के लिए समान होगा।

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