JTET में भोजपुरी-मगही-अंगिका OUT? शिल्पी नेहा तिर्की ने रख दी बड़ी मांग!

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर रोज़गार समाचार विधानसभा चुनाव

JTET में स्थानीय और जनजातीय भाषाओं को प्राथमिकता देने की मांग, शिल्पी नेहा तिर्की ने रखा पक्ष

झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में स्थानीय और जनजातीय भाषाओं को प्राथमिकता देने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने भाषा कमेटी के समक्ष अपनी अनुशंसाएँ रखते हुए कहा कि JTET केवल एक प्रतियोगी परीक्षा नहीं, बल्कि शिक्षकों की अनिवार्य पात्रता तय करने वाली परीक्षा है। ऐसे में परीक्षा की भाषा नीति राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए।

प्रमुख बातें
JTET में स्थानीय और जनजातीय भाषाओं को प्राथमिकता देने की मांग।
शिल्पी नेहा तिर्की ने भाषा को शिक्षण का महत्वपूर्ण उपकरण बताया।
भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने का किया विरोध।
राज्य की अधिसूचित भाषाओं को ही परीक्षा में अधिमानता देने की पैरवी।
2023 के राजपत्र के आधार पर भाषा नीति तय करने की मांग।

भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, शिक्षा की आधारशिला
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड जैसे बहुभाषी राज्य में भाषा केवल बातचीत का माध्यम नहीं है, बल्कि शिक्षा का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। उनका कहना था कि शिक्षक तभी प्रभावी ढंग से पढ़ा सकते हैं जब वे बच्चों की भाषाई, सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को समझते हों।
उन्होंने वर्ष 1981 में तत्कालीन आयुक्त डॉ. कुमार सुरेश सिंह की अनुशंसाओं और डॉ. रामदयाल मुंडा द्वारा रांची विश्वविद्यालय में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाएं लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा रही हैं।

स्थानीय भाषाओं में पढ़ने वाले छात्रों के हितों की रक्षा जरूरी
शिल्पी नेहा तिर्की ने स्थापित शैक्षणिक सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि जिन भाषाओं के माध्यम से विद्यार्थियों का अध्ययन-अध्ययन होता है, उन्हीं भाषाओं को शिक्षण सेवाओं की पात्रता परीक्षाओं में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा व्यवस्था स्थानीय जरूरतों और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप बनती है। साथ ही विद्यालयों में नियुक्त शिक्षक बच्चों से उनकी परिचित भाषा में संवाद स्थापित करने में सक्षम होते हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होती है।

किसी वर्ग को बाहर करना उद्देश्य नहीं
मंत्री ने स्पष्ट किया कि JTET में राज्य की प्रमुख और व्यापक रूप से प्रचलित भाषाओं को शामिल करने का उद्देश्य किसी वर्ग को बाहर करना नहीं है। उनका कहना था कि यह व्यवस्था केवल विद्यार्थियों के शैक्षिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर पर बच्चों की मातृभाषा या परिचित भाषा में संवाद स्थापित कर पाना एक शिक्षक की महत्वपूर्ण योग्यता होनी चाहिए।

भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने का विरोध
भाषा कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड का गठन राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय अधिकारों की रक्षा के लिए हुआ था। ऐसे में पिछले वर्षों में हुए प्रवासन या जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर पड़ोसी राज्यों की भाषाओं को JTET में शामिल करना उचित नहीं होगा।

उन्होंने तर्क दिया कि भोजपुरी, मगही और अंगिका को बिहार की सभी सरकारी भर्तियों में भी समान रूप से अनिवार्य या आधिकारिक दर्जा प्राप्त नहीं है। इसलिए इन्हें झारखंड की शिक्षक पात्रता परीक्षा का आधार बनाना स्थानीय युवाओं के रोजगार अवसरों को प्रभावित कर सकता है।
2023 के गजट के आधार पर बने भाषा नीति
मंत्री ने मांग की कि JTET में भाषा संबंधी नीति का निर्धारण कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग द्वारा 13 मार्च 2023 को जारी राजपत्र (गजट संख्या 147/148) के आधार पर किया जाए।

उनका कहना था कि जब तक स्पष्ट स्थानीय नीति लागू नहीं होती, तब तक परीक्षा का पाठ्यक्रम और भाषा ही स्थानीय युवाओं को अवसर प्रदान करने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए राज्य की अधिसूचित क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं को ही JTET में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
क्या है सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती?
JTET की भाषा नीति को लेकर राज्य में बहस तेज हो चुकी है। एक ओर स्थानीय और जनजातीय भाषाओं को प्राथमिकता देने की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी ओर अन्य भाषाओं को शामिल करने की भी मांग की जा रही है। ऐसे में सरकार और भाषा कमेटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलित निर्णय लेने की होगी, ताकि स्थानीय पहचान, शैक्षिक हित और रोजगार के अवसरों के बीच संतुलन बना रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *