JPSC-JSSC FIR विवाद में बाबूलाल मरांडी और रांची CO शिवशंकर पांडेय के बयान

FIR पर आमने-सामने मरांडी और CO, किसकी बात में कितना दम?

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JPSC-JSSC छात्रों पर FIR को लेकर सियासी घमासान, बाबूलाल मरांडी के आरोप पर CO शिवशंकर पांडेय का जवाब

रांची में JPSC और JSSC छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIR को लेकर सियासी विवाद बढ़ गया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने FIR को एकतरफा बताते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, वहीं रांची अंचल अधिकारी-सह-दंडाधिकारी शिवशंकर पांडेय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्राथमिकी मौके पर उनके द्वारा देखी गई घटनाओं के आधार पर दर्ज की गई है।

प्रमुख बातें

  • बाबूलाल मरांडी ने FIR को बताया एकतरफा
  • प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर गुंडागर्दी करने वालों पर भी FIR की मांग
  • कार्रवाई नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी
  • CO शिवशंकर पांडेय ने कहा- FIR में कोई पक्षपात नहीं
  • CO के मुताबिक, मौके पर जो देखा गया, उसी आधार पर दर्ज हुई प्राथमिकी

बाबूलाल मरांडी ने FIR पर उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि JPSC और JSSC छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद रांची के अंचल अधिकारी-सह-दंडाधिकारी की ओर से दर्ज की गई प्राथमिकी एकतरफा है। उनका कहना है कि यदि प्रदर्शन के दौरान किसी पक्ष की ओर से कानून का उल्लंघन या कथित तौर पर गुंडागर्दी की गई है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए।
मरांडी ने कहा कि केवल छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्षता से जांच हो और जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ समान रूप से कानूनी कार्रवाई की जाए।

‘कार्रवाई नहीं हुई तो जारी रहेगा विरोध’

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब तक कथित तौर पर जिम्मेदार अन्य लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। जरूरत पड़ने पर कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी भी उन्होंने दी।
मरांडी के बयान के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। वहीं, छात्रों का विरोध प्रदर्शन समाप्त होने के बावजूद FIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है।

CO शिवशंकर पांडेय ने दिया जवाब

बाबूलाल मरांडी के आरोपों पर रांची अंचल अधिकारी-सह-दंडाधिकारी शिवशंकर पांडेय ने स्पष्ट किया कि प्राथमिकी किसी पक्ष को निशाना बनाकर दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि JPSC-JSSC छात्रों के पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान मौके पर उन्होंने जो कुछ देखा, उसी के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई।
शिवशंकर पांडेय ने कहा कि FIR में किसी प्रकार का पक्षपात नहीं है। उनके मुताबिक, प्राथमिकी दर्ज करने का आधार मौके पर सामने आई घटनाएं और उनके द्वारा देखा गया घटनाक्रम है।

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अब आमने-सामने हैं दोनों पक्षों के दावे

इस पूरे विवाद में एक ओर बाबूलाल मरांडी FIR को एकतरफा बताते हुए सभी पक्षों पर समान कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं CO शिवशंकर पांडेय का कहना है कि प्राथमिकी मौके पर देखी गई घटनाओं के आधार पर दर्ज की गई है और इसमें कोई पक्षपात नहीं किया गया।
ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या इस मामले में प्रशासन की ओर से विस्तृत जांच या अन्य कार्रवाई की जाएगी? साथ ही, क्या FIR को लेकर विपक्ष और प्रशासन के बीच विवाद आगे और बढ़ेगा, यह भी देखने वाली बात होगी।

राजनीतिक रूप से गरमाया JPSC-JSSC विवाद

झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म है। छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद दर्ज FIR ने इस विवाद को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। विपक्ष जहां प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, वहीं प्रशासन FIR को तथ्यों और मौके पर देखी गई घटनाओं के आधार पर दर्ज किए जाने की बात कह रहा है।

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