चंपाई सोरेन ने बिरसा मुंडा के वंशजों की जमीन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए

‘जो अंग्रेज नहीं कर पाए, अबुआ सरकार ने कर दिखाया!’ चंपाई सोरेन का बड़ा बयान

झारखंड/बिहार विधानसभा चुनाव

बिरसा मुंडा के वंशजों की जमीन पर निर्माण का आरोप, चंपाई सोरेन ने सरकार पर साधा निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों की जमीन को लेकर झारखंड सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिरसा मुंडा के परिवार की खतियानी जमीन छीनी जा रही है और उनकी सहमति के बिना वहां सरकारी निर्माण कराया जा रहा है। चंपाई सोरेन ने इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा की है।

प्रमुख बातें

  • चंपाई सोरेन ने बिरसा मुंडा के वंशजों की जमीन का मुद्दा उठाया।
  • आरोप लगाया कि उनकी मर्जी के बिना जमीन पर सरकारी निर्माण हो रहा है।
  • पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे लेकर झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोला।
  • उन्होंने हूल दिवस के दौरान सिदो-कान्हू के वंशजों पर लाठीचार्ज का भी जिक्र किया।
  • धर्मांतरण और कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा।
  • चंपाई सोरेन ने आदिवासी अस्तित्व और संस्कृति को लेकर चिंता जताई।

बिरसा मुंडा के वंशजों की जमीन को लेकर सवाल

चंपाई सोरेन ने अपनी पोस्ट में कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के परिवार की खतियानी जमीन छीनी जा रही है। उनका आरोप है कि परिवार की इच्छा के खिलाफ इस जमीन पर सरकारी निर्माण कराया जा रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो काम अंग्रेज भी नहीं कर पाए, वह मौजूदा सरकार ने कर दिखाया।

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‘अबुआ सरकार’ पर चंपाई सोरेन का हमला

चंपाई सोरेन ने अपनी पोस्ट में झारखंड सरकार को निशाने पर लेते हुए ‘तथाकथित अबुआ सरकार’ का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस सरकार से आदिवासी हितों की रक्षा की उम्मीद की जाती है, उसी सरकार के कार्यकाल में आदिवासी महापुरुषों के वंशजों की जमीन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हालांकि, जमीन पर सरकारी निर्माण और उसे छीने जाने से जुड़े आरोपों पर संबंधित सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया इस पोस्ट में सामने नहीं आई है।

सिदो-कान्हू के वंशजों का भी किया जिक्र

चंपाई सोरेन ने पिछले साल हूल दिवस के दौरान वीर सिदो-कान्हू के वंशजों पर कथित लाठीचार्ज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ आदिवासी महापुरुषों के सम्मान की बात होती है, जबकि दूसरी तरफ उनके वंशजों से जुड़े मामलों को लेकर विवाद सामने आते हैं।

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धर्मांतरण और घुसपैठ के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में धर्मांतरण और कथित बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन मामलों में संरक्षण देने का काम कर रही है।

चंपाई सोरेन ने इसे आदिवासियों के अस्तित्व और उनकी संस्कृति से जोड़ते हुए कहा कि समाज को समय रहते इन मुद्दों को समझना होगा, वरना स्थिति गंभीर होने के बाद बहुत देर हो सकती है।

‘महापुरुषों और संस्कृति से दूर करने की साजिश’ का आरोप

चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि आदिवासियों को उनके महापुरुषों और संस्कृति से दूर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने समाज को सचेत करते हुए कहा कि यदि इन मुद्दों को समय रहते नहीं समझा गया तो भविष्य में स्थिति गंभीर हो सकती है।

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