रिम्स-2 पर सियासत तेज: बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर बड़ा हमला, बोले- ‘नगड़ी की एक इंच जमीन नहीं छिनने देंगे’
रांची- नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि विकास के नाम पर आदिवासी किसानों की जमीन जबरन लेने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
मरांडी ने दावा किया कि नगड़ी की उपजाऊ कृषि भूमि पर प्रस्तावित परियोजना को लेकर स्थानीय आदिवासी परिवारों में असंतोष है और भाजपा उनकी जमीन बचाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
प्रमुख बातें
- रिम्स-2 परियोजना को लेकर बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर साधा निशाना।
- नगड़ी की कृषि भूमि अधिग्रहण का किया विरोध।
- आदिवासी परिवारों की सहमति के बिना जमीन लेने का आरोप।
- भाजपा ने आदिवासियों और किसानों के समर्थन में आंदोलन की चेतावनी दी।
- रिम्स-2 के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशने की मांग।
हेमंत सरकार पर बाबूलाल मरांडी का हमला
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना के नाम पर आदिवासी जमीन अधिग्रहण की तैयारी की जा रही है।
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मरांडी ने कहा कि यदि सरकार यह सोच रही है कि स्थानीय लोगों की इच्छा के विरुद्ध जमीन ली जाएगी, तो यह संभव नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा आदिवासियों, किसानों और स्थानीय निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।
नगड़ी की जमीन को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
रांची के नगड़ी क्षेत्र की जमीन पहले भी कई बार विवादों और आंदोलनों का केंद्र रही है। प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना के लिए भूमि चयन की चर्चाओं के बीच स्थानीय स्तर पर विरोध की आवाजें भी सामने आने लगी हैं।
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मरांडी का कहना है कि जिन खेतों पर वर्षों से सैकड़ों परिवार निर्भर हैं, उन्हें उनकी सहमति के बिना विस्थापित करना उचित नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर लोगों की आजीविका और पारंपरिक अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
‘पहले मौजूदा रिम्स की व्यवस्था सुधारें’
भाजपा नेता ने कहा कि राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल रिम्स स्वयं कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में सरकार को पहले मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि रांची और आसपास के क्षेत्रों में ऐसे कई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध हैं, जहां रिम्स-2 परियोजना स्थापित की जा सकती है। इसलिए उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण अंतिम विकल्प नहीं होना चाहिए।
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‘जमीन केवल संपत्ति नहीं, पहचान का सवाल’
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आदिवासियों के लिए जमीन केवल आर्थिक संसाधन नहीं बल्कि उनकी संस्कृति, परंपरा और पहचान का आधार है। उन्होंने कहा कि भूमि से जुड़े मामलों में स्थानीय समुदाय की सहमति और भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
मरांडी ने यह भी कहा कि भाजपा आदिवासी हितों से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी और प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी रहेगी।
रिम्स-2 परियोजना पर बढ़ सकती है राजनीतिक गर्मी
रिम्स-2 परियोजना को लेकर भाजपा के खुलकर विरोध में आने के बाद आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है। एक ओर सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इसे जमीन और विस्थापन के मुद्दे से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।
ऐसे में नगड़ी की जमीन और रिम्स-2 परियोजना आने वाले समय में झारखंड की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकती है।
