झारखंड मत्स्य पालन में लगाएगा छलांग: मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के हैदराबाद दौरे से संकेत
🔑 प्रमुख बिंदु:
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झारखंड में एक्वा पार्क बनाने की योजना पर विचार
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100 मत्स्य पालक भेजे जाएंगे हैदराबाद प्रशिक्षण के लिए
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सैलमन फिश फार्म और नई प्रजातियों का अध्ययन
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तेलंगाना मॉडल से झारखंड सीख सकता है धान अधिग्रहण
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मत्स्य और कृषि अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक
हैदराबाद दौरे में मत्स्य फार्म का निरीक्षण और उन्नत तकनीक की जानकारी
झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की इन दिनों हैदराबाद दौरे पर हैं। अपने दौरे के दौरान उन्होंने नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड और वहां के प्रमुख फिश फार्म का दौरा कर मत्स्य पालन में अपनाई जा रही उन्नत तकनीकों का अध्ययन किया। खास बात यह रही कि उन्होंने उस फार्म का निरीक्षण किया जहां महंगी सैलमन फिश तैयार की जाती है, जिसकी बाजार कीमत ₹3,000 प्रति किलो है।
झारखंड में एक्वा पार्क और उन्नत मत्स्य प्रशिक्षण की योजना
मंत्री ने इस दौरे के दौरान संकेत दिया कि झारखंड सरकार राज्य में एक्वा पार्क स्थापित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इससे राज्य के बड़ी संख्या में युवाओं और मत्स्य पालकों को जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही पहले चरण में 100 मत्स्य पालकों को हैदराबाद भेज कर प्रशिक्षण देने की योजना है। मत्स्य विभाग के अधिकारी भी तकनीकी जानकारी के लिए वहां भेजे जाएंगे।

तेलंगाना मॉडल से मिलेगा धान अधिग्रहण का रास्ता
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने तेलंगाना सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के साथ भी अहम बैठक की। इसमें खासकर धान अधिग्रहण नीति और किसानों की आय बढ़ाने वाली योजनाओं पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि झारखंड भविष्य में तेलंगाना के मॉडल को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
किसानों को योजनाओं के प्रति जागरूक करना ज़रूरी
बैठक में मंत्री ने कहा कि तेलंगाना और झारखंड दोनों ही राज्य किसानों की बेहतरी के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसानों की आय में वृद्धि और शोषण से सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए जरूरी है कि झारखंड के किसान भी विभागीय योजनाओं के प्रति उतने ही जागरूक हों, जितने तेलंगाना के किसान हैं।
उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारी रहे मौजूद
इस दौरे और बैठकों में झारखंड के विशेष सचिव गोपाल जी तिवारी, प्रदीप कुमार हजारी, मत्स्य निदेशक एच.एन. द्विवेदी सहित तेलंगाना सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में नीतिगत सहयोग, तकनीकी आदान-प्रदान और संयुक्त प्रयासों पर सहमति बनी।
झारखंड सरकार मत्स्य पालन और कृषि क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। हैदराबाद दौरा इसका स्पष्ट संकेत है। अगर यह योजनाएं धरातल पर उतरती हैं, तो झारखंड न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि हजारों किसानों और मत्स्य पालकों की आय में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
