कांग्रेस का भाजपा पर पलटवार, डॉ. एम. तौसीफ बोले- JPSC विवाद की शुरुआत बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल से हुई
रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया संयोजक डॉ. एम. तौसीफ ने JPSC और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि JPSC विवाद की शुरुआत झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल से हुई थी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
प्रमुख बातें
- कांग्रेस ने JPSC विवाद को लेकर भाजपा पर साधा निशाना
- बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल की जांच कराने की मांग
- शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रियाओं पर भाजपा को घेरा
- NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
- भाजपा सांसदों पर राजनीतिक दिखावे का लगाया आरोप
बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल पर उठाए सवाल
डॉ. एम. तौसीफ ने कहा कि JPSC में कथित अनियमितताओं की शुरुआत बाबूलाल मरांडी के मुख्यमंत्री रहते हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय आयोग में नियुक्तियों को लेकर गंभीर सवाल उठे थे और विरोध के बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा।
उन्होंने कहा कि यदि JPSC विवाद की निष्पक्ष जांच होनी है तो इसकी शुरुआत शुरुआती दौर से होनी चाहिए।
भाजपा पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारों के दौरान शिक्षा व्यवस्था लगातार प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं, प्रश्नपत्र लीक और नियुक्ति प्रक्रियाओं में देरी ने युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद देशभर में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं, जिससे छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है।
NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच की मांग
डॉ. तौसीफ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करती है। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार इस मामले में निष्पक्ष जांच कराने में सक्षम नहीं है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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भाजपा सांसदों पर साधा निशाना
उन्होंने झारखंड के भाजपा सांसदों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सांसद संसद परिसर में JPSC-JSSC मुद्दे पर विरोध दर्ज करा रहे हैं, लेकिन NEET पेपर लीक जैसे राष्ट्रीय मुद्दे पर छात्रों के हित में समान रूप से मुखर नहीं दिखे। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रदर्शन बताते हुए कहा कि छात्रों के हित सर्वोपरि होने चाहिए।
