बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन पर रायपुर रिसॉर्ट और शराब घोटाले को लेकर सवाल उठाए

“छत्तीसगढ़ ही क्यों चुना?” बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन को घेरा

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बाबूलाल मरांडी का बड़ा हमला: रायपुर रिसॉर्ट से शराब घोटाले तक, हेमंत सोरेन से पूछे कई सवाल

रांची- झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरते हुए छत्तीसगढ़ कनेक्शन और कथित शराब घोटाले को लेकर कई सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने बयान में उन्होंने रायपुर रिसॉर्ट प्रकरण, अनवर ढेबर और शराब नीति से जुड़े मुद्दों को जोड़ते हुए सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए।

प्रमुख बातें

  • बाबूलाल मरांडी ने रायपुर रिसॉर्ट प्रकरण को लेकर सवाल उठाए।
  • छत्तीसगढ़ में विधायकों को ठहराने के फैसले पर जवाब मांगा।
  • शराब घोटाले के कथित मुख्य सूत्रधार अनवर ढेबर का जिक्र किया।
  • झारखंड की शराब नीति को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
  • लालू यादव के उदाहरण से सत्ता और जवाबदेही की चर्चा की।

रायपुर रिसॉर्ट को लेकर उठाए सवाल

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब खदान लीज मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता पर संकट के बादल मंडरा रहे थे, तब वे अपने विधायकों के साथ छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित एक रिसॉर्ट में ठहरे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार जैसे अन्य राज्यों के बजाय छत्तीसगढ़ को ही क्यों चुना गया।

मरांडी ने पूछा कि आखिर छत्तीसगढ़ में ऐसा कौन व्यक्ति था, जिसके भरोसे पूरी व्यवस्था की गई और विधायकों के ठहरने की जिम्मेदारी संभाली गई।

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अनवर ढेबर का जिक्र कर साधा निशाना

नेता प्रतिपक्ष ने अपने बयान में झारखंड-छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के कथित मुख्य सूत्रधार अनवर ढेबर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज जब ईडी की कार्रवाई का दायरा बढ़ रहा है, तब यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि रायपुर में हुई मेजबानी पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये क्यों खर्च किए गए।

उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि उस समय की व्यवस्थाओं के पीछे कौन लोग थे और उनकी भूमिका क्या थी।

शराब घोटाले की जांच पर भी उठाए सवाल

मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड में शराब घोटाले से जुड़े मामलों में तथ्यों को कमजोर करने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि पूरे मामले का दोष कुछ अधिकारियों तक सीमित करने का प्रयास किया गया, जबकि राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी का भी आकलन होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जांच चाहे किसी भी एजेंसी द्वारा हो, लेकिन जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

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लालू यादव का उदाहरण देकर दी नसीहत

अपने बयान में बाबूलाल मरांडी ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास बताता है कि सत्ता और राजनीतिक प्रभाव हमेशा स्थायी नहीं होते।

मरांडी ने कहा कि चारा घोटाला मामले में लालू यादव को भी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ा था। उनके अनुसार यह इस बात का उदाहरण है कि समय आने पर हर फैसले और हर व्यवस्था का मूल्यांकन होता है।

शराब नीति को लेकर भी सरकार को घेरा

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड की शराब नीति में किए गए बदलावों को लेकर पहले भी कई सवाल उठाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नीतिगत फैसलों से राज्य को आर्थिक नुकसान की आशंका पैदा हुई।

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कहा कि सरकार को इन सभी सवालों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए, क्योंकि जनता और विपक्ष दोनों जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

जनता और कानून दोनों देख रहे हैं

अपने बयान के अंत में मरांडी ने कहा कि सत्ता का कार्यकाल सीमित हो सकता है, लेकिन सरकारों द्वारा लिए गए फैसलों का प्रभाव लंबे समय तक रहता है। उन्होंने कहा कि जनता सभी घटनाक्रमों पर नजर रख रही है और कानून भी हर निर्णय का जवाब मांगने की क्षमता रखता है।

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