रांची प्रेस क्लब में आदिवासी परिसीमन विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते बंधु तिर्की

क्या घटेंगी आदिवासी आरक्षित सीटें? रांची में उठी बड़ी आवाज

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आदिवासी आरक्षित सीटों में कटौती बर्दाश्त नहीं होगी: बंधु तिर्की

रांची। प्रेस क्लब सभागार में “आदिवासी परिसीमन का आदिवासी समाज पर प्रभाव” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने परिसीमन के मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि संविधान ने अनुसूचित जनजातियों के लिए सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों का विशेष प्रावधान किया है और इन सीटों की संख्या अथवा उनकी मूल भावना को प्रभावित करने वाला कोई भी कदम संविधान की भावना के खिलाफ माना जाएगा।

प्रमुख बातें

  • रांची प्रेस क्लब में आदिवासी परिसीमन पर संगोष्ठी आयोजित
  • बंधु तिर्की ने आदिवासी आरक्षित सीटों की सुरक्षा पर जोर दिया
  • परिसीमन के नाम पर सीटों में कमी का विरोध
  • कांग्रेस सहित सभी धर्मनिरपेक्ष दलों से एकजुट होने की अपील
  • संविधान की मूल भावना को बनाए रखने की बात कही

संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा जरूरी

बंधु तिर्की ने कहा कि अनुसूचित जनजातियों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संविधान में आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों का प्रावधान किया गया है। यह व्यवस्था आदिवासी समुदाय की आवाज को लोकतांत्रिक संस्थाओं तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में यदि परिसीमन की प्रक्रिया के दौरान इन सीटों की संख्या या प्रभाव को कम करने का प्रयास किया जाता है, तो यह संविधान की मूल भावना के साथ अन्याय होगा।

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लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट होने का आह्वान

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा से जुड़े किसी भी मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती के साथ खड़ी है। साथ ही उन्होंने सभी धर्मनिरपेक्ष दलों और संविधान में आस्था रखने वाले नागरिकों से इस विषय पर सजग रहने और एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।

आदिवासी प्रतिनिधित्व पर चिंता

संगोष्ठी में वक्ताओं ने आदिवासी क्षेत्रों में संभावित परिसीमन के प्रभावों पर भी चर्चा की। उनका मानना था कि यदि आदिवासी आबादी और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन प्रभावित होता है, तो इससे समाज के सामाजिक, राजनीतिक और विकासात्मक हितों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

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अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा

बंधु तिर्की ने कहा कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने दोहराया कि आरक्षित सीटों की संख्या और उनकी प्रभावशीलता को कमजोर करने वाले किसी भी प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया जाएगा।

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