भोजपुरी-मगही-अंगिका का मुद्दा अब दिल्ली दरबार तक, दीपिका पांडे सिंह पीछे हटने को तैयार नहीं
रांची। झारखंड में JTET 2026 में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने की मांग अब केवल राज्य स्तर का मुद्दा नहीं रह गई है। यह विवाद अब दिल्ली तक पहुंच चुका है और कांग्रेस संगठन के शीर्ष नेतृत्व के सामने भी रख दिया गया है। कांग्रेस कोटे की मंत्री दीपिका पांडे सिंह इस मुद्दे पर लगातार मुखर हैं और फिलहाल पीछे हटने के संकेत नहीं दे रही हैं।
प्रमुख बातें
- JTET 2026 में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने की मांग तेज।
- मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कांग्रेस प्रभारी के. राजू को सौंपा सुझाव पत्र।
- भाषा विवाद अब रांची से निकलकर दिल्ली तक पहुंचा।
- राज्य सरकार ने मंत्रियों की समिति में दो नए सदस्यों को जोड़ा।
- 3 जून को होने वाली बैठक पर टिकी हैं सभी की नजरें।
कांग्रेस के जरिए दिल्ली तक पहुंचा भाषा विवाद
झारखंड में क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर चल रहा विवाद अब कांग्रेस नेतृत्व तक पहुंच गया है। मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू को लिखित सुझाव पत्र सौंपकर इस मुद्दे पर पार्टी का ध्यान आकर्षित किया है।
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राजनीतिक हलकों में इसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अब यह मामला केवल शिक्षा विभाग या राज्य सरकार के स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कांग्रेस संगठन के भीतर भी इस पर गंभीर चर्चा हो सकती है।
दीपिका पांडे ने क्यों उठाया मुद्दा?
मंत्री दीपिका पांडे सिंह का कहना है कि वर्ष 2008, 2012 और 2016 में आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में भोजपुरी, मगही और अंगिका को क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में शामिल किया गया था। लेकिन JTET 2026 की वर्तमान अधिसूचना में इन भाषाओं को जगह नहीं दी गई है।
उनका तर्क है कि क्षेत्रीय भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि लोगों की सांस्कृतिक पहचान और विरासत से भी जुड़ी होती हैं। ऐसे में इन भाषाओं को परीक्षा से बाहर रखना लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय बन सकता है।
सरकार ने बढ़ाई मंत्रियों की समिति
भाषा विवाद को बढ़ता देख राज्य सरकार भी सक्रिय नजर आ रही है। सरकार द्वारा पहले से गठित मंत्रियों के समूह (Group of Ministers) का विस्तार किया गया है।
अब इस समिति में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और मंत्री हाफिजुल हसन को भी शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि नए सदस्यों के जुड़ने से विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के दृष्टिकोण को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।
3 जून की बैठक होगी निर्णायक?
भाषा विवाद पर गठित मंत्रियों के समूह की अगली महत्वपूर्ण बैठक 3 जून को प्रस्तावित है। इस बैठक में भोजपुरी, मगही और अंगिका समेत विभिन्न भाषाई मांगों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार संभावित समाधान और विभिन्न विकल्पों पर विचार कर सकती है ताकि भाषा विवाद को लेकर बढ़ रहे असंतोष को कम किया जा सके।
बढ़ता जा रहा है राजनीतिक दबाव
भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने की मांग को लेकर छात्र संगठन, सामाजिक समूह और विभिन्न भाषाई संगठन पहले से आंदोलनरत हैं। अब कांग्रेस की सक्रियता ने इस मुद्दे को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मामला लगातार राजनीतिक समर्थन प्राप्त करता रहा तो सरकार पर जल्द निर्णय लेने का दबाव बढ़ सकता है।
रांची से दिल्ली तक गूंजी भाषाई पहचान की लड़ाई
फिलहाल स्थिति यह है कि भोजपुरी, मगही और अंगिका का मुद्दा अब केवल एक प्रशासनिक या विभागीय बहस नहीं रह गया है। यह झारखंड की राजनीति, क्षेत्रीय पहचान और भाषाई अधिकारों से जुड़ा बड़ा विषय बन चुका है।
3 जून की बैठक से पहले सभी की निगाहें सरकार और मंत्रियों की समिति पर टिकी हुई हैं। अब देखना होगा कि सरकार भाषाई संतुलन, क्षेत्रीय अपेक्षाओं और परीक्षा प्रणाली की व्यावहारिक जरूरतों के बीच किस तरह का समाधान निकालती है।
