परिसीमन और आरक्षित सीटों को लेकर बयान देते स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी

‘कान खोलकर सुन ले BJP’… आरक्षित सीटों को लेकर इरफान अंसारी का बड़ा हमला

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परिसीमन पर इरफान अंसारी का भाजपा को सीधा संदेश, कहा- एसटी-एससी सीटों में कटौती किसी कीमत पर स्वीकार नहीं

झारखंड में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर सियासत तेज होती जा रही है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भाजपा को सीधे निशाने पर लेते हुए स्पष्ट कहा है कि राज्य में ऐसा कोई भी परिसीमन लागू नहीं होने दिया जाएगा, जिससे अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों में कमी आए।

प्रमुख बातें

  • परिसीमन को लेकर डॉ. इरफान अंसारी का बड़ा बयान
  • एसटी-एससी आरक्षित सीटों में कटौती का विरोध
  • भाजपा को दी खुली चेतावनी
  • आदिवासी, दलित, पिछड़ा वर्ग और मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा का दावा
  • राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर करने की कोशिशों का विरोध

भाजपा को दी चेतावनी

डॉ. इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि भाजपा के नेताओं को यह बात स्पष्ट रूप से समझ लेनी चाहिए कि झारखंड में ऐसा कोई परिसीमन स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे आदिवासी और दलित समाज के राजनीतिक अधिकार प्रभावित हों।

उन्होंने कहा कि राज्य की सामाजिक संरचना और यहां के मूल निवासियों के हितों को ध्यान में रखे बिना लिया गया कोई भी फैसला स्वीकार्य नहीं होगा।

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कमजोर नहीं होने देंगे राजनीतिक प्रतिनिधित्व

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आदिवासी, दलित, पिछड़े वर्गों और मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी भी प्रक्रिया के माध्यम से इन वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करने की कोशिश की गई, तो उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

डॉ. अंसारी ने कहा कि इन समुदायों की आवाज को कमजोर करने का कोई भी प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।

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‘जो भी आवश्यक होगा, करेंगे’

अपने बयान में मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि आरक्षित सीटों में कटौती की दिशा में कोई कदम उठाया जाता है, तो उसके खिलाफ हर लोकतांत्रिक और संवैधानिक विकल्प अपनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए जो भी आवश्यक होगा, वह किया जाएगा।

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परिसीमन पर बढ़ सकती है राजनीतिक गर्मी

डॉ. इरफान अंसारी के इस बयान के बाद झारखंड में परिसीमन का मुद्दा और अधिक राजनीतिक रूप ले सकता है। राज्य में पहले से ही आदिवासी संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से आरक्षित सीटों को लेकर चिंता जताई जा रही है।

ऐसे में मंत्री का यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।

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