रघुवर दास की तस्वीर के साथ बिजली संकट पर आधारित न्यूज़ थंबनेल, जिसमें “बिजली व्यवस्था फेल?” लिखा है।

‘बिजली उत्पादन बढ़ा, फिर कटौती क्यों?’ रघुवर दास ने सरकार को घेरा

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झारखंड में बिजली संकट पर रघुवर दास का हमला, हेमंत सरकार से पूछा- ‘जब उत्पादन बढ़ा तो व्यवस्था बदहाल क्यों?’

Top Points

  • पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बिजली व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखा पत्र
  • अनियमित बिजली आपूर्ति, लो-वोल्टेज और ट्रांसफॉर्मर खराब होने पर जताई चिंता
  • दावा- भाजपा सरकार में 68 लाख घरों तक पहुंची थी बिजली
  • PTPS और NTPC नॉर्थ कर्णपुरा परियोजना का किया उल्लेख
  • ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा और विशेष अभियान चलाने की मांग

झारखंड में बिजली व्यवस्था को लेकर रघुवर दास का हेमंत सरकार पर हमला

झारखंड में लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि राज्य में अनियमित बिजली आपूर्ति, लो-वोल्टेज, ट्रांसफॉर्मरों के बार-बार खराब होने और उपभोक्ता सेवाओं में गिरावट से आम जनता परेशान है। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण और शहरी इलाकों में घंटों बिजली कटौती से जनजीवन, शिक्षा, कृषि, व्यापार और उद्योग प्रभावित हो रहे हैं।

रघुवर दास ने अपने पत्र में कहा कि वर्तमान स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि वर्ष 2014 से 2019 के दौरान उनकी सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना विकसित की थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय झारखंड को “पावर हब” बनाने के लक्ष्य के साथ कई दूरगामी परियोजनाएं शुरू की गई थीं।

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भाजपा सरकार की उपलब्धियां गिनाईं

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2014 में जहां केवल 38 लाख घरों तक बिजली पहुंची थी, वहीं उनकी सरकार ने 68 लाख परिवारों तक बिजली उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में—

  • 4027 किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइन बिछाई गई
  • 1,41,976 किलोमीटर लंबी विद्युत वितरण लाइन तैयार की गई
  • 132 केवी और 220 केवी नेटवर्क का विस्तार किया गया
  • कई नए ग्रिड सब-स्टेशन और पावर सब-स्टेशन बनाए एवं आधुनिकीकृत किए गए
  • शहरी क्षेत्रों में R-APDRP योजना के तहत अंडरग्राउंड केबलिंग और नए ट्रांसफॉर्मर लगाए गए
  • बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 600 से अधिक लाइनमैन की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई

उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के कारण ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति मजबूत हुई थी।

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PTPS और NTPC परियोजनाओं का भी किया जिक्र

रघुवर दास ने Patratu Thermal Power Station (PTPS) के पुनरुद्धार का उल्लेख करते हुए कहा कि NTPC के साथ संयुक्त उद्यम के तहत लगभग 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए Patratu Vidyut Utpadan Nigam Limited (PVUNL) का गठन किया गया था। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि झारखंड को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना, उद्योगों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराना और रोजगार सृजन करना था।

उन्होंने दावा किया कि परियोजना के तहत वर्ष 2022 तक 800 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद अनदेखी के कारण काम समय पर पूरा नहीं हो सका। हालांकि उन्होंने कहा कि इस वर्ष मार्च में यहां 800 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है और जल्द दूसरी यूनिट से भी उत्पादन शुरू होने वाला है।

इसके अलावा उन्होंने NTPC नॉर्थ कर्णपुरा परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां से वर्ष 2023 में बिजली उत्पादन शुरू हुआ, जिससे राज्य बिजली उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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‘ऊर्जा मंत्री होने के बावजूद व्यवस्था बदहाल’

रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए कहा कि वह स्वयं ऊर्जा मंत्री भी हैं, इसके बावजूद राज्य में बिजली व्यवस्था लगातार अव्यवस्थित होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में बनाई गई आधारभूत संरचनाओं का समुचित रखरखाव और विस्तार नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने कहा कि जनता यह महसूस कर रही है कि बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार गंभीर नहीं है।

सरकार से की ये प्रमुख मांगें

पूर्व मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा कराने और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की। उन्होंने सरकार से—

  • निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने
  • खराब ट्रांसफॉर्मरों को शीघ्र बदलने के लिए विशेष अभियान चलाने
  • लो-वोल्टेज और बार-बार बिजली कटौती की समस्या दूर करने
  • ट्रांसमिशन एवं वितरण नेटवर्क के रखरखाव को प्राथमिकता देने
  • उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली को जवाबदेह बनाने

की मांग की है।

जनता को राहत देने की मांग

रघुवर दास ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति की रीढ़ होता है और झारखंड की जनता बेहतर बुनियादी सुविधाओं की अपेक्षा रखती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार बिजली व्यवस्था को सुचारू करने के लिए जल्द ठोस कदम उठाएगी और जनता को राहत पहुंचाएगी।

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