CBSE Result विवाद पर भड़कीं दीपिका पांडेय सिंह, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
रांची- देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। NEET परीक्षा विवाद के बाद अब CBSE रिजल्ट और उत्तरपुस्तिका जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच झारखंड सरकार की कैबिनेट मंत्री Deepika Pandey Singh ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को अपनी ही उत्तरपुस्तिका दोबारा देखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जो शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
“डिजिटल भारत” के दावों पर उठाए सवाल
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री डिजिटल भारत की बात करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग दिखाई देती है। उनके मुताबिक कई छात्रों को गलत कॉपी अपलोड होने, उत्तर जांच से छूट जाने और पोर्टल तकनीकी खराबी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि जब छात्र अपनी मेहनत की सही जांच जानने के लिए अतिरिक्त शुल्क देने को मजबूर हों, तो यह केवल तकनीकी गलती नहीं बल्कि शिक्षा मंत्रालय की सीधी असफलता है।
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“बच्चे कमाई का साधन नहीं”
मंत्री ने कहा कि देश के बच्चे भविष्य हैं, कमाई का जरिया नहीं। उन्होंने मांग की कि हर छात्र को उसकी उत्तरपुस्तिका निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए और संदिग्ध परिणामों की स्वतः जांच होनी चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र के परिणाम में गलती पाई जाती है, तो:
- तुरंत सुधार किया जाए
- शुल्क वापस किया जाए
- छात्रों से माफी मांगी जाए
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
दीपिका पांडेय सिंह ने शिक्षा मंत्रालय की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मंत्रालय बच्चों के भविष्य की रक्षा नहीं कर पा रहा, तो शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लगातार परीक्षा और रिजल्ट विवाद छात्रों के मानसिक तनाव को बढ़ा रहे हैं और इससे शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हो रहा है।
शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ती बहस
NEET विवाद के बाद अब CBSE परिणाम प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है। छात्र, अभिभावक और शिक्षा विशेषज्ञ पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली की मांग कर रहे हैं।
अब देखना होगा कि CBSE और शिक्षा मंत्रालय इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
