शिल्पी नेहा तिर्की का भाजपा-आरएसएस पर हमला, कहा- धर्म की राजनीति से झारखंड को बांटने की कोशिश
रांची- झारखंड सरकार की मंत्री Shilpi Neha Tirkey ने राज्य में सरना, सनातन और डीलिस्टिंग जैसे मुद्दों को लेकर चल रही राजनीति पर भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश संविधान से चलता है, किसी दल या व्यक्ति विशेष की वैचारिक जिद और फरमान से नहीं।
“संविधान की मूल आत्मा धर्मनिरपेक्षता”
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि भारतीय संविधान की मूल आत्मा धर्मनिरपेक्षता है। संविधान हर नागरिक को अपनी अंतरात्मा के अनुसार किसी भी धर्म और आस्था को मानने, पालन करने और प्रचार करने का मौलिक अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि यही भारत की लोकतांत्रिक ताकत और विविधता की असली पहचान है।
“डीलिस्टिंग और सरना मुद्दे के पीछे राजनीतिक एजेंडा”
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस द्वारा डीलिस्टिंग, सरना और ईसाई समुदाय को लेकर खड़ा किया जा रहा राजनीतिक विमर्श एक सुनियोजित एजेंडा का हिस्सा है। मंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य समाज को धार्मिक आधार पर बांटना और आदिवासी समुदायों को आपस में लड़ाना है।
उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल कर जल, जंगल और जमीन पर कॉरपोरेट कब्जे का रास्ता साफ करने की कोशिश की जा रही है।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ का उदाहरण दिया
शिल्पी नेहा तिर्की ने ओडिशा के नियमगिरि पहाड़ी क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां वेदांता की बॉक्साइट खनन परियोजना के खिलाफ डोंगरिया कोंध आदिवासियों ने लंबे समय तक संघर्ष किया। आदिवासियों ने साफ कहा था कि नियमगिरि उनकी आस्था और अस्तित्व का केंद्र है।
उन्होंने ओडिशा के सीजिमाली पहाड़ी क्षेत्र का भी जिक्र किया, जहां स्थानीय आदिवासी खनन परियोजनाओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि लोगों को डर है कि खनन परियोजनाओं से जंगल, जलस्रोत, खेती और सांस्कृतिक पहचान खत्म हो जाएगी।
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“हसदेव जंगल इसका बड़ा उदाहरण”
मंत्री ने छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कोयला खदानों के विस्तार के नाम पर लाखों पेड़ों की कटाई हो रही है और आदिवासी समुदाय विस्थापन और पलायन का सामना कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दों की राजनीति कर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
“झारखंड नफरत की राजनीति स्वीकार नहीं करेगा”
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी आदिवासी-मूलवासी संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और संघर्ष की विरासत है। उन्होंने कहा कि धर्म की राजनीति की आग में झारखंड को झोंकने की कोशिश बंद होनी चाहिए।
उन्होंने राज्य की जनता से भाजपा और आरएसएस के “विभाजनकारी और कॉरपोरेटपरस्त एजेंडे” से सतर्क रहने की अपील की।
“जल, जंगल, जमीन और संविधान की रक्षा के लिए जनता एकजुट”
मंत्री ने कहा कि झारखंड की जनता जल, जंगल, जमीन और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट है और किसी भी कीमत पर अपनी पहचान, संस्कृति और अधिकारों पर हमला बर्दाश्त नहीं करेगी।
