राज्यसभा सीट पर महागठबंधन में खींचतान! कांग्रेस-जेमएम की अलग-अलग बैठकें, क्या बनने से पहले बिगड़ रहा समीकरण?
रांची- राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। महागठबंधन के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं दिख रहा। एक तरफ कांग्रेस अपने विधायकों के साथ रणनीति बनाने में जुटी है, तो दूसरी ओर झारखंड मुक्ति मोर्चा भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में अलग बैठकें कर चुनावी गणित साधने में लगा है। सबसे बड़ी चर्चा राज्यसभा की उस एक सीट को लेकर है, जिस पर अब तक महागठबंधन के सहयोगी दलों के बीच अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।
प्रमुख बातें
- राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर कांग्रेस और झामुमो की अलग-अलग बैठकें
- कांग्रेस विधायक दल ने बनाई चुनावी रणनीति
- मुख्यमंत्री आवास पर झामुमो नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक
- राज्यसभा की एक सीट पर अब भी बना हुआ है सस्पेंस
- बिहार की राजनीति का असर झारखंड के गठबंधन समीकरण पर पड़ता दिख रहा
- महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर अंदरखाने मंथन जारी
कांग्रेस विधायक दल की बैठक में चुनावी रणनीति पर चर्चा
रांची स्थित राजकीय अतिथिशाला में कांग्रेस विधायक दल की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, सह-प्रभारी भूपेंद्र मरावी, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, उपनेता राजेश कच्छप तथा राज्यसभा प्रत्याशी प्रणव झा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बैठक में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर विस्तृत रणनीति पर चर्चा की गई। इसके साथ ही प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर भी मंथन किया गया। कांग्रेस नेतृत्व ने चुनाव को लेकर संगठनात्मक एकजुटता और विधायकों के समन्वय पर विशेष जोर दिया।
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मुख्यमंत्री आवास पर झामुमो की समानांतर रणनीति
इधर, कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर भी राज्यसभा चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में झामुमो के वरिष्ठ नेताओं और संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
सूत्रों के अनुसार बैठक में आगामी चुनाव की तैयारियों, राजनीतिक परिस्थितियों और संगठनात्मक मजबूती को लेकर चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व ने राज्यसभा चुनाव को सिर्फ एक संसदीय चुनाव नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश देने का अवसर माना है।
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एक सीट पर क्यों अटका है मामला?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा की एक सीट को लेकर महागठबंधन के भीतर अब तक स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई है। झामुमो इस बार अपने राजनीतिक हितों और संगठनात्मक ताकत को देखते हुए अधिक सक्रिय भूमिका में दिखाई दे रहा है।
पार्टी के भीतर यह भावना भी बताई जा रही है कि गठबंधन राजनीति में केवल एकतरफा समझौते की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। बिहार में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और सहयोगी दलों के व्यवहार को भी झामुमो नेतृत्व ध्यान में रख रहा है।
क्या कांग्रेस के पास विकल्प सीमित हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान विधानसभा गणित को देखते हुए कांग्रेस के लिए झामुमो का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में कांग्रेस गठबंधन धर्म को बनाए रखते हुए सहमति का रास्ता तलाशने में जुटी है।
दूसरी ओर झामुमो भी अपनी राजनीतिक ताकत और संगठनात्मक प्रभाव का संदेश देना चाहता है। यही कारण है कि दोनों दलों के बीच लगातार बैठकों और संवाद का दौर जारी है।
आने वाले दिनों में साफ होगी तस्वीर
राज्यसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। फिलहाल कांग्रेस और झामुमो दोनों सार्वजनिक रूप से गठबंधन की मजबूती की बात कर रहे हैं, लेकिन राज्यसभा की एक सीट को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या महागठबंधन सहमति का फार्मूला निकाल पाएगा या फिर राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तनाव और बढ़ेगा।
