धर्मांतरण मुद्दे पर बयान देते पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन

JMM में चुप, BJP में मुखर! धर्मांतरण पर फिर गरजे चंपई सोरेन

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धर्मांतरण पर फिर मुखर हुए चंपई सोरेन, बोले- “सरना-मसना पर ताले लगे, चर्चों की संख्या बढ़ी”

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपई सोरेन ने एक बार फिर धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मिशनरी गतिविधियों के कारण आदिवासी समाज की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

सिमडेगा जिले का जिक्र करते हुए चंपई सोरेन ने कहा कि जहां पहले सरना-मसना जैसे पारंपरिक धार्मिक स्थल आदिवासी समाज की पहचान थे, वहीं अब कई स्थानों पर उनकी स्थिति कमजोर हुई है और चर्चों की संख्या बढ़ी है।

प्रमुख बातें

  • धर्मांतरण के मुद्दे पर फिर मुखर हुए चंपई सोरेन।
  • सिमडेगा जिले का उदाहरण देकर उठाए सवाल।
  • सरना-मसना स्थलों की स्थिति पर जताई चिंता।
  • CNT जमीन पर बने संस्थानों को लेकर सवाल खड़े किए।
  • आदिवासी सामाजिक व्यवस्था पर प्रभाव का लगाया आरोप।

सिमडेगा का जिक्र कर उठाए सवाल

चंपई सोरेन ने कहा कि सिमडेगा जैसे जिलों में आदिवासी समाज की पारंपरिक पहचान से जुड़े कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उनके अनुसार, जिन स्थानों पर पहले सरना और मसना आदिवासी धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र हुआ करते थे, वहां अब स्थिति बदलती नजर आ रही है।

उन्होंने दावा किया कि कई क्षेत्रों में चर्चों की संख्या लगातार बढ़ी है, जबकि पारंपरिक धार्मिक स्थलों का महत्व कम होता गया है। चंपई ने इसे आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के लिए चिंता का विषय बताया।

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CNT जमीन पर भी उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) के तहत संरक्षित जमीनों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि CNT कानून आदिवासी भूमि की सुरक्षा के लिए बनाया गया था।

चंपई सोरेन ने सवाल किया कि यदि CNT की जमीन न तो ईसाई समुदाय की है और न ही किसी अन्य अल्पसंख्यक संस्था की, तो फिर इन जमीनों पर बड़े-बड़े शिक्षण संस्थान और अन्य प्रतिष्ठान कैसे स्थापित हुए। उन्होंने इस विषय पर पारदर्शिता और स्पष्ट जवाब की आवश्यकता बताई।

“सामाजिक व्यवस्था बदलने की कोशिश”

चंपई सोरेन ने आरोप लगाया कि कुछ शक्तियां झारखंड की मूल सामाजिक संरचना को बदलने का प्रयास कर रही हैं। उनके अनुसार, आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा, भाषा और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है और इन तत्वों को कमजोर करने का प्रयास गंभीर विषय है।

उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान को बनाए रखने के लिए आदिवासी समाज को अपनी परंपराओं और अधिकारों के प्रति सजग रहने की जरूरत है।

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राजनीतिक गलियारों में तेज हुई बहस

चंपई सोरेन के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में धर्मांतरण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भाजपा लंबे समय से धर्मांतरण और घुसपैठ जैसे मुद्दों को उठाती रही है, जबकि विपक्षी दल इन आरोपों को राजनीतिक एजेंडा बताते रहे हैं।

गौरतलब है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) में रहने के दौरान चंपई सोरेन सार्वजनिक रूप से धर्मांतरण और घुसपैठ के मुद्दों पर उतने मुखर नहीं दिखे थे। हालांकि भाजपा में शामिल होने के बाद वे लगातार इन विषयों पर बयान देते रहे हैं। ऐसे में उनके ताजा बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

आगे क्या?

झारखंड में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी समीकरणों के बीच धर्मांतरण का मुद्दा एक बार फिर प्रमुख बहस बनता दिख रहा है। आने वाले दिनों में इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। फिलहाल चंपई सोरेन के बयान ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

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