स्कूलों पर सख्त शर्तों का विरोध, आज पूरे राज्य में होगा ड्राफ्ट दहन

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वित्त रहित संस्थानों का बड़ा ऐलान: आज नियमावली ड्राफ्ट की प्रतियां जलेंगी, 12 जून को लोकभवन के समक्ष महाधरना

रांची- झारखंड में नई शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई एक ही परिसर में संचालित करने के लिए बनाई जा रही नई नियमावली को लेकर विवाद गहरा गया है। वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा झारखंड ने प्रस्तावित “माध्यमिक विद्यालय (सेकेंडरी) कक्षा 9-12 स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति शर्त एवं बंधेज नियमावली 2026” के ड्राफ्ट का कड़ा विरोध करते हुए 2 जून को राज्यभर के वित्त रहित संस्थानों के मुख्य द्वार पर इसकी प्रतियां जलाने तथा 12 जून को लोकभवन के समक्ष विशाल महाधरना आयोजित करने की घोषणा की है।

प्रमुख बातें

  • आज राज्यभर में ड्राफ्ट नियमावली की प्रतियां जलाने का ऐलान
  • 12 जून को लोकभवन के सामने विशाल महाधरना होगा
  • मोर्चा ने ड्राफ्ट को त्रुटिपूर्ण और अव्यावहारिक बताया
  • भूमि, भवन, प्रयोगशाला और सुरक्षा कोष संबंधी शर्तों पर आपत्ति
  • 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि पर शीघ्र निर्णय की मांग
  • जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय जाने की चेतावनी

समिति की अनुशंसा पर उठाए सवाल

मोर्चा ने कहा कि वित्त रहित संस्थानों से संबंधित नियमावली तैयार करने के लिए गठित समिति, जिसके संयोजक शिवेंदु कुमार हैं, ने 22 मई 2026 को बैठक कर अपनी अनुशंसाएं विभाग को सौंप दी हैं। समिति में झारखंड अधिविद्य परिषद के सचिव, शिक्षा परियोजना के पदाधिकारी तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग के उप सचिव भी शामिल हैं।

हालांकि मोर्चा का आरोप है कि समिति की अनुशंसाएं कई त्रुटियों से भरी हुई हैं। उनका कहना है कि भवन, सुरक्षा, शिक्षकों और प्रयोगशालाओं से जुड़ी ऐसी शर्तें प्रस्तावित की गई हैं, जिन्हें राज्य के अधिकांश वित्त रहित संस्थान पूरा नहीं कर पाएंगे।

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भूमि के मानक पर दोहरे मापदंड का आरोप

मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित नियमावली में वित्त रहित संस्थानों के लिए दो एकड़ भूमि अनिवार्य की गई है, जबकि सरकारी विद्यालयों के लिए केवल एक एकड़ भूमि का प्रावधान रखा गया है।

संघर्ष मोर्चा ने सवाल उठाया कि जब दोनों प्रकार के संस्थान शिक्षा प्रदान कर रहे हैं तो अलग-अलग मानक क्यों लागू किए जा रहे हैं। मोर्चा ने मांग की है कि वित्त रहित संस्थानों के लिए भी भूमि की अनिवार्यता एक एकड़ निर्धारित की जाए, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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प्रयोगशाला और भवन संबंधी शर्तों पर आपत्ति

प्रस्तावित नियमावली में चार प्रयोगशालाओं का प्रावधान किया गया है, जिनमें प्रत्येक का क्षेत्रफल 1000 वर्ग फीट निर्धारित किया गया है। इसके अलावा कंप्यूटर कक्ष के लिए भी 1000 वर्ग फीट भवन की शर्त जोड़ी गई है।

मोर्चा का कहना है कि राज्य के अधिकांश सरकारी प्लस-टू विद्यालयों में भी इतनी बड़ी प्रयोगशालाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए प्रयोगशाला कक्ष का क्षेत्रफल 600 वर्ग फीट तथा छात्र-छात्राओं के कॉमन रूम का क्षेत्रफल 300 वर्ग फीट निर्धारित किया जाना चाहिए।

सुरक्षा कोष की राशि कम करने की मांग

ड्राफ्ट नियमावली में जनजातीय क्षेत्रों के लिए 4 लाख रुपये तथा सामान्य क्षेत्रों के लिए 6 लाख रुपये सुरक्षा कोष जमा करने का प्रस्ताव रखा गया है।

मोर्चा ने इसे पूरी तरह अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि अधिकांश वित्त रहित संस्थान इतनी बड़ी राशि जमा करने की स्थिति में नहीं हैं। संगठन ने मांग की है कि जनजातीय क्षेत्रों में सुरक्षा कोष 75 हजार रुपये और सामान्य क्षेत्रों में 1.50 लाख रुपये निर्धारित किया जाए।

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सभी मान्यता प्राप्त संस्थानों को मिले पढ़ाई की अनुमति

संघर्ष मोर्चा ने सरकार से मांग की है कि जहां वर्तमान में कक्षा 9 और 10 की पढ़ाई हो रही है, वहां कक्षा 11 और 12 की पढ़ाई की अनुमति दी जाए। इसी प्रकार जहां इंटरमीडिएट स्तर की पढ़ाई संचालित हो रही है, वहां कक्षा 9 और 10 चलाने की अनुमति भी प्रदान की जाए।

मोर्चा का सुझाव है कि संस्थानों को तत्काल अनुमति देकर पांच वर्षों के भीतर निर्धारित मानकों को पूरा करने का अवसर दिया जाए। यदि कोई संस्थान पांच वर्षों में मानक पूरे नहीं करता है, तो उसकी अनुमति समाप्त की जा सकती है।

संथाल परगना और औद्योगिक क्षेत्रों की समस्याएं भी उठाईं

मोर्चा के नेताओं ने कहा कि एसपीटी एक्ट के तहत भूमि संबंधी जटिलताओं के कारण संथाल परगना में वर्ष 2010 के बाद से किसी नए संस्थान को मान्यता नहीं मिल पाई है। उन्होंने प्रधानी पट्टा, दानपत्र और मदरसों की तर्ज पर भूमि संबंधी सुविधाएं देने की मांग की।

इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में एनओसी की अनिवार्यता को भी मान्यता प्रक्रिया में बड़ी बाधा बताया गया। मोर्चा का कहना है कि जब तक इन मुद्दों का समाधान नहीं होगा, तब तक नए संस्थानों को मान्यता मिलना मुश्किल रहेगा।

75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि पर भी जताई चिंता

बैठक में वित्त रहित संस्थानों को 75 प्रतिशत अनुदान देने संबंधी संचिका पर भी चर्चा हुई। मोर्चा ने मुख्यमंत्री से इस मामले में शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया।

नेताओं ने कहा कि सरकार ने विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 में 75 प्रतिशत अनुदान देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में अपेक्षित गति से कार्रवाई नहीं हो रही है।

शिक्षा सचिव से संवाद की मांग

मोर्चा ने शिक्षा सचिव से अपील की है कि नियमावली को अंतिम रूप देने से पहले संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों को बुलाकर विस्तृत विमर्श किया जाए। संगठन का कहना है कि यदि उनकी आपत्तियों और सुझावों पर विचार नहीं किया गया तो वे 2026 की नियमावली को स्वीकार नहीं करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की शरण भी लेंगे।

बैठक में रघुनाथ सिंह, गणेश महतो, अरविंद सिंह, संजय कुमार, रघु विश्वकर्मा, नरोत्तम सिंह, फजलुल कादरी अहमद, हरिहर प्रसाद कुशवाहा और रणजीत मिश्रा सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे। प्रेस को बैठक की जानकारी मनीष कुमार ने दी।

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