झारखंड में नई शिक्षा नियमावली 2026 को लेकर बढ़ी चिंता, प्राचार्यों की अहम बैठक 25 मई को
बड़ी बातें
- नई शिक्षा नीति 2020 के तहत झारखंड में नई नियमावली 2026 की तैयारी
- 19 और 22 मई की बैठक में नियमावली का प्रारूप तैयार
- 9-10 और 11-12 की प्रस्वीकृति अब साथ में मिलेगी
- सुरक्षा राशि और भवन मानकों में बड़े बदलाव
- प्राचार्यों और संबंधित संस्थानों की बड़ी बैठक 25 मई को रांची में
नई शिक्षा नियमावली 2026 की तैयारी तेज
झारखंड सरकार नई शिक्षा नीति 2020 को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में 19 मई और 22 मई 2026 को हुई बैठकों में नई शिक्षा नियमावली 2026 का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार समिति के सभी सदस्यों ने प्रारूप पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि समिति जल्द ही अपनी अनुशंसा विभागीय सचिव को सौंप देगी, जिसके बाद नियमावली को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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प्रस्वीकृति प्रक्रिया होगी और कठिन
नई नियमावली लागू होने के बाद स्कूलों और कॉलेजों के लिए प्रस्वीकृति लेना पहले की तुलना में काफी कठिन हो सकता है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार अब 9-10 और 11-12 की प्रस्वीकृति अलग-अलग नहीं मिलेगी, बल्कि दोनों की मान्यता एक साथ लेनी होगी।
इसके अलावा भवन के आकार, संरचना, सुरक्षा मानकों और अन्य शर्तों में भी बड़े बदलाव किए गए हैं।
सुरक्षा राशि में बड़ा बदलाव
सूत्रों के अनुसार सुरक्षा राशि जमा करने की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। पहले विद्यालयों द्वारा सुरक्षा राशि प्रधानाचार्य और सचिव के नाम पर जमा की जाती थी, लेकिन नई व्यवस्था में यह राशि सीधे सरकार के पास जमा करनी होगी।
बताया जा रहा है कि सुरक्षा राशि की रकम भी काफी बढ़ाई गई है, जिससे छोटे और वित्त रहित संस्थानों की चिंता बढ़ गई है।
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शासी निकाय में भी बदलाव
नई नियमावली में शासी निकाय के गठन में भी बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं। दानदाता और अन्य सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई है। साथ ही एक महिला और एक पुरुष सदस्य को शामिल करने का प्रावधान भी रखा गया है।
25 मई को रांची में अहम बैठक
इन सभी मुद्दों को लेकर मोर्चा की ओर से 25 मई 2026 को रांची के सर्वोदय बाल निकेतन उच्च विद्यालय, धुर्वा में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। बैठक सुबह 11 बजे से शुरू होगी।
मोर्चा ने सभी इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालय और मदरसा विद्यालय के प्राचार्यों एवं प्रधानाचार्यों से बैठक में शामिल होने की अपील की है।
मोर्चा ने जताई चिंता
मोर्चा का कहना है कि सरकार द्वारा बनाई जा रही नियमावली काफी जटिल है और इससे भविष्य में नए संस्थान खोलना तथा प्रस्वीकृति लेना मुश्किल हो जाएगा।
साथ ही यह भी कहा गया है कि संस्कृत और मदरसा विद्यालयों में भी जल्द नई व्यवस्था लागू की जा सकती है।
