मुख्य बिंदु:
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9 अक्टूबर 2025 को हुई आंतरिक नियुक्ति परीक्षा में अनियमितताओं का आरोप
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MANAGER (F&A) और जूनियर मैनेजर (टेक्निकल) पदों पर नियमों का उल्लंघन
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दूरस्थ शिक्षा से डिग्री प्राप्त अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव
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सूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी पर विभाग की चुप्पी
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संघ ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की
रांची, 14 अक्टूबर 2025:
झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने 9 अक्टूबर 2025 को आयोजित आंतरिक नियुक्ति परीक्षा में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मामले की सार्वजनिक जांच की मांग की है। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड और इसकी अनुषंगी कंपनियों — JBVNL, JUSNL, JUUNL — के अंतर्गत विज्ञापन संख्या 01/2024, 03/2024, 04/2024 और 05/2024 के अंतर्गत आयोजित परीक्षा पूरी तरह से अपारदर्शी, संदिग्ध और पक्षपातपूर्ण रही।
MANAGER (F&A) पद में नियमों का उल्लंघन
अजय राय ने बताया कि MANAGER (F&A) पद पर 11 अभ्यर्थियों को पात्र घोषित किया गया, जिन्होंने नौकरी करते हुए ही रेगुलर मोड से MBA की डिग्री प्राप्त की। नियमों के अनुसार, नौकरी के दौरान शैक्षणिक अवकाश प्रमाणपत्र आवश्यक होता है, जिसे इन अभ्यर्थियों ने प्रस्तुत नहीं किया।
जूनियर मैनेजर (टेक्निकल) पद में अयोग्यता और भेदभाव
जूनियर मैनेजर (टेक्निकल) पद के लिए योग्य अभ्यर्थियों को केवल प्रतिशत के आधार पर अयोग्य ठहराया गया, जबकि राज्य सरकार और JPSC की वैकेंसी में केवल डिप्लोमा या डिग्री ही पात्रता का मानक है।
इसके अलावा, दूरस्थ शिक्षा (IGNOU और अन्य विश्वविद्यालयों) से डिग्री प्राप्त अभ्यर्थियों के साथ दोहरी नीति अपनाई गई — कुछ को वैध मानकर परीक्षा में बैठाया गया, जबकि कई अन्य को मनमाने ढंग से अयोग्य ठहरा दिया गया।
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सूचना अधिकार और पारदर्शिता की विफलता
संघ ने इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी थी, लेकिन 6 महीने बीत जाने के बावजूद विभाग ने कोई जवाब नहीं दिया। अजय राय ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि विभाग अनियमितताओं को छिपाने की कोशिश कर रहा है।
संघ की मांग और चेतावनी
झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने कहा कि वह नियुक्तियों का विरोध नहीं करता, लेकिन 9 अक्टूबर की परीक्षा की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करता है। अजय राय ने चेतावनी दी कि अगर निगम प्रबंधन ने इस मुद्दे पर तुरंत संज्ञान नहीं लिया, तो संघ न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होगा।
संघ ने कहा कि यह मामला सिर्फ भर्ती परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरे निगम की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से जुड़ा है। अगर न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई, तो कर्मचारियों और जनता का भरोसा प्रणाली से उठ सकता है।
