JTET भाषा विवाद पहुंचा राजभवन, छात्र नेता राहुल कुमार ने राज्यपाल से लगाई गुहार
झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर जारी विवाद अब राजभवन तक पहुंच गया है। छात्र नेता राहुल कुमार ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर भोजपुरी, मगही और अंगिका को JTET में शामिल करने की मांग उठाई। मुलाकात के बाद राहुल कुमार ने दावा किया कि राज्यपाल ने पूरे मामले को गंभीरता से सुना और सरकार तक छात्रों की बात पहुंचाने का आश्वासन दिया है।
प्रमुख बातें
- JTET भाषा विवाद अब राजभवन तक पहुंचा
- छात्र नेता राहुल कुमार ने राज्यपाल से की मुलाकात
- भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने की उठाई मांग
- राज्यपाल ने सरकार तक बात पहुंचाने का दिया आश्वासन
- छात्रों में बढ़ रही है नाराजगी और असमंजस
- भाषा विवाद पर सरकार और JAC पहले से घिरे हुए हैं
राज्यपाल से छात्रों की मांग
राजभवन में हुई मुलाकात के दौरान छात्र नेता राहुल कुमार ने कहा कि भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी भाषाओं को JTET से बाहर करना लाखों छात्रों और अभ्यर्थियों की भावनाओं के साथ अन्याय है। उन्होंने राज्यपाल से हस्तक्षेप कर सरकार से इन भाषाओं को फिर से शामिल करने की मांग करने का आग्रह किया।
राहुल कुमार ने कहा कि इन भाषाओं से जुड़े अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है और लगातार आंदोलन की स्थिति बन रही है। ऐसे में सरकार को जल्द स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
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राज्यपाल ने दिया सकारात्मक आश्वासन
मीडिया से बातचीत करते हुए राहुल कुमार ने बताया कि राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने पूरे मामले पर सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि छात्रों की मांग और चिंता को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
हालांकि, अभी तक राजभवन की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन छात्र संगठनों ने इसे अपने आंदोलन की बड़ी उपलब्धि बताया है।
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पहले से विवादों में घिरी है सरकार
JTET भाषा विवाद को लेकर सरकार, कार्मिक विभाग, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और JAC बोर्ड पहले से सवालों के घेरे में हैं। विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं हो पाने से विवाद और बढ़ता जा रहा है।
हाई पावर कमेटी भी अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि वर्ष 2012 में भाषाओं को शामिल करने और 2026 की नियमावली में हटाने का आधार क्या था। ऐसे में छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है।
छात्रों के आंदोलन के तेज होने के संकेत
भाषा विवाद को लेकर छात्र संगठन लगातार विरोध दर्ज करा रहे हैं। कई संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि यह केवल परीक्षा नहीं बल्कि क्षेत्रीय पहचान और भाषाई सम्मान से भी जुड़ा हुआ मामला बन चुका है।
अब सरकार के फैसले पर टिकी नजरें
राज्यपाल से मुलाकात के बाद अब छात्रों और अभ्यर्थियों की निगाहें राज्य सरकार पर टिक गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार विवाद को शांत करने के लिए भाषाओं को फिर से शामिल करेगी या फिर यह मामला और ज्यादा गरमाएगा।
