शिक्षकों के वेतनमान और आलिम–फाजिल डिग्री मान्यता पर कार्रवाई की मांग.

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शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों पर दीपिका पांडे सिंह सक्रिय, मुख्यमंत्री से मिलीं — सौंपा विस्तृत ज्ञापन

मुख्य बिंदु:

गैर सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों के वेतनमान और सेवा शर्तों पर चर्चा

आलिम–फाजिल डिग्री मान्यता और B.Ed, D.El.Ed में उर्दू–बांग्ला लिपि बहाली की मांग

रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति और नई शिक्षा नीति के अनुरूप दिशा-निर्देश जारी करने पर जोर

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रांची- शिक्षकों और विद्यार्थियों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर झारखंड की ग्रामीन विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने आज मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने गैर सरकारी सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित) प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों और आलिम–फाजिल डिग्री से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

शिक्षकों की लंबित मांगों पर चर्चा

ज्ञापन में शिक्षकों की कई महत्वपूर्ण मांगों को प्रमुखता से रखा गया। इसमें गैर सरकारी सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक मध्य विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के 4240 पदों को पूर्ववत रखने, भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन करने और पूर्णकालिक केंशोलिक कार्यकर्ताओं (फादर, ब्रदर, सिस्टर) की नियुक्ति में पुराने प्रावधान बनाए रखने की मांग की गई। साथ ही, सहायक आचार्यों को सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के समान सेवा शर्त और वेतनमान देने की अनुशंसा भी शामिल थी।

इसके अलावा, ज्ञापन में विभिन्न जिलों में रिक्त और स्वीकृत पदों पर नियुक्तियों के अनुमोदन को शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया गया, ताकि शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता आ सके।

नई शिक्षा नीति 2020 से जुड़ी मांगें

दीपिका सिंह ने नई शिक्षा नीति 2020 के आलोक में उत्क्रमित विद्यालयों (कक्षा IX–XII) के संचालन हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता बताई। साथ ही, कक्षा VII–IX तक संचालित विद्यालयों में पद सृजन सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया, ताकि शिक्षा के स्तर में सुधार हो सके।

आलिम–फाजिल डिग्री और भाषा आधारित प्रशिक्षण पर भी जोर

ज्ञापन में आलिम और फाजिल डिग्री की वैधानिक मान्यता को 2003–2023 तक बरकरार रखने की मांग की गई। इसके साथ ही, B.Ed और D.El.Ed पाठ्यक्रमों में उर्दू और बांग्ला लिपि की बहाली तथा फाजिल प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को माध्यमिक आचार्य परीक्षा में शामिल करने की बात भी रखी गई।

शिक्षा से संबंधित इस मुद्दे पर यह भी आग्रह किया गया कि रांची विश्वविद्यालय से परीक्षा पुनः आयोजित कराई जाए, ताकि विद्यार्थियों के हित सुरक्षित रह सकें और उनके शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा हो सके।

“शिक्षक शिक्षा तंत्र की रीढ़ हैं” — दीपिका पांडे सिंह

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि शिक्षक हमारे शिक्षा तंत्र की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से सभी मांगों पर त्वरित और न्यायसंगत कार्रवाई करने का अनुरोध किया।

> “शिक्षकों और विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा के बिना शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती। मुख्यमंत्री से हमें सकारात्मक पहल की उम्मीद है,” — दीपिका पांडे सिंह

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