भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देते राज्यपाल और मुख्यमंत्री

आखिर क्यों आज भी पूरे देश में याद किए जाते हैं भगवान बिरसा मुंडा?

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बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, बोले- सदियों तक याद रखा जाएगा उनका संघर्ष

रांची- झारखंड में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर श्रद्धा और सम्मान का माहौल देखने को मिला। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने रांची में उनके समाधि स्थल और प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि सवा सौ वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी भगवान बिरसा मुंडा का व्यक्तित्व और संघर्ष देशभर के लोगों को प्रेरित कर रहा है। उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे।

प्रमुख बातें

  • भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर रांची में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित।
  • राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने किया नमन।
  • कोकर स्थित समाधि स्थल पर अर्पित की गई पुष्पांजलि।
  • बिरसा चौक स्थित प्रतिमा पर भी नेताओं ने दी श्रद्धांजलि।
  • मुख्यमंत्री ने कहा- धरती आबा का संघर्ष और आदर्श सदियों तक याद रखा जाएगा।

कोकर स्थित समाधि स्थल पहुंचे राज्यपाल और मुख्यमंत्री

भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि के अवसर पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन रांची के कोकर स्थित उनके समाधि स्थल पहुंचे। यहां दोनों नेताओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर धरती आबा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

इस दौरान उपस्थित लोगों ने भी भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष और बलिदान को याद किया तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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बिरसा चौक में प्रतिमा पर किया नमन

समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि देने के बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री बिरसा चौक पहुंचे। यहां भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें कोटि-कोटि नमन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान धरती आबा के व्यक्तित्व, उनके सामाजिक योगदान और ब्रिटिश शासन के खिलाफ उनके संघर्ष को याद किया गया।

मुख्यमंत्री बोले- सवा सौ साल बाद भी लोगों के दिलों में हैं बिरसा

मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि है और यह गर्व की बात है कि करीब सवा सौ वर्षों के बाद भी उन्हें देशभर में सम्मान और श्रद्धा के साथ याद किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के साथ-साथ अन्य वर्गों के लोग भी धरती आबा के योगदान को याद कर रहे हैं। यह उनकी महानता और उनके संघर्षों की स्वीकार्यता को दर्शाता है।

संघर्ष और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को करेंगे प्रेरित

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने जिस साहस, त्याग और संघर्ष का परिचय दिया, वह आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने जो इतिहास रचा, वह आने वाली कई पीढ़ियों तक याद किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी लोग उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे हैं और आगे भी इसी तरह धरती आबा को सम्मान देने का सिलसिला जारी रहेगा।

झारखंड की पहचान हैं धरती आबा

भगवान बिरसा मुंडा को झारखंड में केवल एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में नहीं, बल्कि आदिवासी स्वाभिमान, जल-जंगल-जमीन और सामाजिक न्याय के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

उनका जीवन संघर्ष, नेतृत्व और सामाजिक जागरूकता की ऐसी मिसाल है, जो आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रही है। यही कारण है कि उनकी पुण्यतिथि पर राज्यभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।

निष्कर्ष

भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि उनके संघर्ष, त्याग और आदर्शों को याद करने का अवसर भी है। सवा सौ साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी धरती आबा की विचारधारा और विरासत लोगों को प्रेरित कर रही है। झारखंड के लिए यह गौरव की बात है कि उनका नाम आज भी सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता है।

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