“आदिवासी बनने की जरूरत क्या है?” कुड़मी समाज के ST दर्जे की मांग पर देव कुमार धान का बड़ा बयान
आदिवासी नेता और पूर्व मंत्री देव कुमार धान ने कुड़मी/कुरमी समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर तीखी आपत्ति जताई है। उन्होंने सवाल उठाया कि कुड़मी समाज को आदिवासी बनने की जरूरत क्यों है। धान ने आरोप लगाया कि ST दर्जे की मांग के पीछे आदिवासियों की जमीन और अधिकारों से जुड़े हित हो सकते हैं।
प्रमुख बातें
- देव कुमार धान ने कुड़मी समाज के ST दर्जे की मांग पर सवाल उठाया
- आदिवासी जमीन और अधिकारों को लेकर लगाए आरोप
- कर्मा पूजा मनाने के तरीके को लेकर भी जताई आपत्ति
- ओडिशा और पश्चिम बंगाल में ST सूची से जुड़े प्रयासों का विरोध करने की बात
- कहा- कुड़मी समाज की इस मांग को सफल नहीं होने दिया जाएगा
“कुड़मी समाज को आदिवासी बनने की क्या जरूरत?”
देव कुमार धान ने कहा कि कुड़मी समाज के पास पहले से संपत्ति और आर्थिक संसाधन हैं, ऐसे में उसे आदिवासी बनने की आवश्यकता क्यों है। उनके बयान के मुताबिक, उन्होंने कुड़मी समाज की ST दर्जे की मांग के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए इसे आदिवासी समाज के अधिकारों और जमीन से जोड़कर देखा।
कर्मा पूजा को लेकर भी उठाए सवाल
देव कुमार धान ने कर्मा पूजा की परंपरा को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि कुड़मी समाज जिस तरीके से कर्मा पूजा मनाता है, वह आदिवासी समाज की पारंपरिक पूजा-पद्धति से अलग है।
हाल ही में झारखंड में आयोजित करमा पर्व के कार्यक्रमों में भी धान की मौजूदगी रही है। 20 सितंबर 2026 को कर्रा में आयोजित करमा पर्व पूर्व संध्या कार्यक्रम में वे विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, वहां उन्होंने करमा पर्व को कृषि और प्रकृति से जुड़ा पर्व बताया।
ST दर्जे की मांग का विरोध
देव कुमार धान ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कुड़मी समाज को आदिवासी सूची में शामिल करने से संबंधित प्रयासों का भी विरोध करने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में इस मांग को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
झारखंड में कुड़मी/कुरमी समाज को ST दर्जा देने की मांग का विरोध पहले भी विभिन्न आदिवासी संगठनों की ओर से किया जाता रहा है। अक्टूबर 2025 में रांची में आयोजित एक आदिवासी रैली में भी इस मांग के खिलाफ प्रदर्शन हुआ था, जिसमें देव कुमार धान समेत कई आदिवासी नेता शामिल हुए थे।
जमीन और आदिवासी अधिकारों का मुद्दा
देव कुमार धान पहले भी आदिवासी जमीन और अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं। अक्टूबर 2024 में चान्हो में आदिवासी संगठनों के एक प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए उन्होंने आदिवासी जमीन की रक्षा और कथित फर्जी खरीद-बिक्री रोकने की मांग उठाई थी।
कुड़मी/कुरमी समाज को ST सूची में शामिल करने की मांग और इसके विरोध का मुद्दा झारखंड में लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय रहा है। इस मुद्दे पर अलग-अलग समुदायों और संगठनों के दावे एवं आपत्तियां सामने आती रही हैं।
