झारखंड के वित्त रहित शिक्षकों का आंदोलन तेज, 25 नवंबर को विधानसभा के सामने होगा महाधरना
रांची: झारखंड के वित्त रहित शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षकों और कर्मचारियों ने लंबित अनुदान भुगतान तथा 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि की मांग को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय तक सभी जिलों की संस्थाओं के बैंक खातों में अनुदान की राशि नहीं पहुंचती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसी क्रम में 7 नवंबर को मोर्चा का सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेगा। इसके बाद भी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 25 नवंबर 2026 को विधानसभा के समक्ष विशाल महाधरना दिया जाएगा।
प्रमुख बातें
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वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि की मांग उठाई।
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वित्तीय वर्ष 2025-26 की अनुदान राशि कई जिलों की संस्थाओं को अब तक नहीं मिली।
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7 नवंबर को सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव से मिलेगा।
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25 नवंबर 2026 को विधानसभा के सामने विशाल महाधरना होगा।
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शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा दिलाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने का निर्णय।
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शीतकालीन सत्र में 10 हजार शिक्षक-कर्मचारियों के साथ विधानसभा घेराव की तैयारी।
कई जिलों में अब तक नहीं पहुंची अनुदान की राशि
वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष मंडल की बैठक में लंबित अनुदान भुगतान के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को विभागीय पत्र जारी कर तीन दिनों के भीतर संबंधित शैक्षणिक संस्थानों के बैंक खातों में अनुदान की राशि भेजने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही आदेश का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।
इसके बावजूद साहिबगंज, गोड्डा, पाकुड़, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और रांची सहित कई जिलों की संस्थाओं को अब तक अनुदान राशि नहीं मिली है। मोर्चा के सदस्यों का कहना है कि इससे शिक्षकों और कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।

12 अक्टूबर को जारी हुई थी राशि, 15 अक्टूबर तक भुगतान का था निर्देश
मोर्चा के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 की अनुदान राशि 12 अक्टूबर 2026 को ही जारी कर दी गई थी। वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारियों को 15 अक्टूबर तक संबंधित संस्थाओं के बैंक खातों में राशि हस्तांतरित करने का निर्देश दिया गया था। इसका उद्देश्य दशहरा से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों को भुगतान उपलब्ध कराना था।
हालांकि, निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बाद भी कई जिलों में भुगतान नहीं हुआ। इतना ही नहीं, मोर्चा ने बताया कि पाकुड़, गोड्डा, दुमका और लातेहार जिलों की अनुदान राशि मार्च महीने में ही संबंधित जिलों को भेज दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद संस्थाओं को भुगतान नहीं किया गया।
अनुदान नहीं मिला तो 2026-27 का प्रपत्र कैसे भरेंगे?
बैठक में 23 नवंबर 2026 को अनुदान प्रपत्र भरने की अंतिम तिथि निर्धारित किए जाने पर भी नाराजगी जताई गई। मोर्चा ने सवाल उठाया कि जब वित्तीय वर्ष 2025-26 की अनुदान राशि ही संस्थानों को नहीं मिली है, तो वे वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुदान प्रपत्र कैसे भरेंगे?
मोर्चा के सदस्यों ने कहा कि जब विभाग की ओर से राशि समय पर उपलब्ध करा दी गई है, तो जिला स्तर पर भुगतान में हो रही देरी की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी क्यों नहीं ले रहे हैं? इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई गई।
त्योहारों में आर्थिक संकट, शिक्षकों में नाराजगी
मोर्चा ने कहा कि दशहरा बीत चुका है, दीपावली का त्योहार आ गया है और छठ महापर्व भी नजदीक है। इसके बावजूद वित्त रहित संस्थानों के शिक्षकों और कर्मचारियों को अनुदान की राशि नहीं मिली है। नतीजतन, वर्षों से अल्प अनुदान पर काम कर रहे शिक्षाकर्मियों के सामने त्योहार मनाने तक का संकट खड़ा हो गया है।
इसी वजह से राज्यभर के शिक्षकों और कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। मोर्चा ने कहा कि शिक्षकों के हितों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
25 नवंबर को विधानसभा के सामने विशाल महाधरना
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 25 नवंबर 2026 को विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान विशाल महाधरना दिया जाएगा। इसके लिए झारखंड के सभी वित्त रहित शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षकों और कर्मचारियों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।
महाधरना के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि, लंबित अनुदान भुगतान और शिक्षकों-कर्मचारियों की अन्य मांगों को पूरा करने की मांग की जाएगी।
मुख्य सचिव से मुलाकात के लिए सात सदस्यीय कमेटी गठित
आंदोलन की अगली रणनीति के तहत मुख्य सचिव से मुलाकात के लिए अरविंद कुमार सिंह के नेतृत्व में सात सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इसमें मनीष कुमार, गणेश महतो, डालेश चौधरी, मनोज तिर्की, संजय कुमार और नरोत्तम सिंह को शामिल किया गया है। यह प्रतिनिधिमंडल 7 नवंबर को मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपेगा।
इसके अलावा, स्थापना अनुमति प्राप्त विद्यालयों का अनुदान रोकने संबंधी अनुदान समिति के निर्णय के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करने का फैसला लिया गया है। छठ पर्व के बाद झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) कार्यालय का घेराव भी किया जाएगा। इसकी तिथि 25 नवंबर के महाधरना में घोषित की जाएगी।
राज्यकर्मी का दर्जा और 10 हजार शिक्षाकर्मियों के साथ विधानसभा घेराव की तैयारी
मोर्चा ने शिक्षकों और कर्मचारियों को राज्यकर्मी का दर्जा दिलाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। वहीं, शीतकालीन सत्र के दौरान 10 हजार शिक्षक-कर्मचारियों के साथ विधानसभा घेराव की रणनीति भी बनाई गई है।
इसके साथ ही अनुदान की राशि सीधे संबंधित संस्थानों के बैंक खातों में भेजने की मांग को लेकर व्यापक आंदोलन करने का फैसला लिया गया। मोर्चा का कहना है कि प्रत्येक वर्ष जिला स्तर पर भुगतान में देरी होती है और कई बार अनुदान की राशि लैप्स हो जाती है। इसलिए मौजूदा भुगतान व्यवस्था में बदलाव जरूरी है।
बैठक में ये पदाधिकारी रहे उपस्थित
अध्यक्ष मंडल की बैठक की अध्यक्षता फजलुल कदीर अहमद ने की, जबकि संचालन गणेश महतो ने किया। बैठक में रघुनाथ सिंह, चंद्रेश्वर पाठक, अरविंद कुमार सिंह, संजय कुमार, मनीष कुमार, पशुपति महतो, मनोज कुमार, रघु विश्वकर्मा, डालेश चौधरी, प्रदीप यादव, गणेश महतो, नरोत्तम सिंह, मनोज तिर्की, विनय उरांव, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, अर्जुन पांडेय, गुंजन कुमार और रंजीत कुमार मिश्रा सहित अध्यक्ष मंडल के सदस्य उपस्थित थे।
