RIMS Media Ban Controversy: रिम्स में मीडिया एंट्री पर रोक को लेकर BJP का हमला, सरकार पर पारदर्शिता से भागने का आरोप
रांची स्थित राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में मीडिया कर्मियों के प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस निर्णय को लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को कठघरे में खड़ा किया है।
प्रमुख बातें
- रिम्स में मीडिया प्रवेश पर रोक को लेकर भाजपा ने जताई कड़ी आपत्ति
- प्रदेश प्रवक्ता रमाकांत महतो ने स्वास्थ्य मंत्री और रिम्स प्रबंधन पर साधा निशाना
- स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियां छिपाने का लगाया आरोप
- फैसले को बताया अलोकतांत्रिक और तानाशाहीपूर्ण
- प्रतिबंध वापस लेने की मांग
मीडिया पर रोक से उठे सवाल
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रमाकांत महतो ने कहा कि रिम्स जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान में मीडिया कर्मियों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय कई गंभीर सवाल खड़े करता है। उनके अनुसार लोकतंत्र में मीडिया केवल खबरों का माध्यम नहीं बल्कि जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाने और व्यवस्था की जवाबदेही तय करने का महत्वपूर्ण स्तंभ है।
उन्होंने कहा कि यदि अस्पताल परिसर में मीडिया की मौजूदगी पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो इससे यह संदेश जाता है कि कहीं न कहीं वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिश की जा रही है।
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स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविकता छिपाने का आरोप
भाजपा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग जनता के सामने स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक तस्वीर आने से बचना चाहते हैं। पार्टी का कहना है कि रिम्स में मरीजों को होने वाली परेशानियां, व्यवस्थागत खामियां और प्रशासनिक कमियां लगातार चर्चा का विषय रही हैं।
ऐसे में मीडिया की पहुंच सीमित करना पारदर्शिता बढ़ाने के बजाय संदेह को और मजबूत करता है। भाजपा का दावा है कि अस्पताल की अव्यवस्थाओं को छिपाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
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कांग्रेस की कार्यशैली पर भी साधा निशाना
रमाकांत महतो ने इस मुद्दे को कांग्रेस की राजनीतिक कार्यशैली से जोड़ते हुए कहा कि देश ने आपातकाल के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता पर लगाए गए प्रतिबंधों को देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में भी उसी सोच की झलक दिखाई दे रही है, जहां आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उनके अनुसार मीडिया की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे जनता के सूचना के अधिकार पर भी असर पड़ता है।
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स्वास्थ्य विभाग पर पुराने मामलों को लेकर भी सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई मामलों पर सवाल उठते रहे हैं। दवा खरीद, चिकित्सा उपकरणों की खरीद, एएनएम नियुक्ति, सुरक्षा गार्ड बहाली समेत कई मुद्दों पर पारदर्शिता को लेकर बहस होती रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में मीडिया की स्वतंत्र निगरानी और रिपोर्टिंग और अधिक जरूरी हो जाती है, ताकि जनता को सही जानकारी मिल सके और जवाबदेही सुनिश्चित हो।
प्रतिबंध हटाने की मांग
भाजपा ने राज्य सरकार से रिम्स में मीडिया प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को तत्काल वापस लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि सरकार को आलोचनाओं से बचने के बजाय स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने और अस्पताल प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
भाजपा ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है और इस तरह के प्रतिबंधात्मक फैसलों से बचा जाना चाहिए।
