JPSC पेपर लीक पर चंपाई सोरेन का बड़ा हमला, बोले- ‘सीट बेचवा सरकार’ में ऊपर से नीचे तक सिस्टम बिका हुआ
झारखंड में JPSC पेपर लीक विवाद को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राज्य सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने और पूरे सिस्टम को भ्रष्टाचार के हवाले करने का गंभीर आरोप लगाया है।
प्रमुख बातें
- चंपाई सोरेन ने झारखंड सरकार को ‘सीट बेचवा सरकार’ बताते हुए निशाना साधा।
- आरोप लगाया कि पेपर लीक मामले में ऊपर से नीचे तक पूरा सिस्टम भ्रष्ट है।
- CID की जांच और राज्य सरकार की एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
- कहा कि आरोपी के पेपर लीक स्वीकार करने के बावजूद सरकार मामले को नकार रही है।
- पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए CBI जांच की मांग की।
- युवाओं के आंदोलन और सरकार के रवैये को लेकर भी निशाना साधा।
‘सीट बेचवा सरकार’ पर चंपाई सोरेन का हमला
पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर JPSC पेपर लीक विवाद को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं होती होंगी, लेकिन झारखंड में स्थिति इससे भी ज्यादा गंभीर है।
चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि झारखंड की ‘सीट बेचवा सरकार’ में ऊपर से नीचे तक पूरा सिस्टम ही बिका हुआ है। उन्होंने दावा किया कि सत्ता के संरक्षण में युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले लोग सक्रिय हैं।
CID की जांच पर भी उठाए सवाल
चंपाई सोरेन ने पेपर लीक मामले की जांच कर रही CID की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब CID के माध्यम से हाई कोर्ट तक को गुमराह किया जा सकता है, तो राज्य सरकार की एजेंसियों पर भरोसा कैसे किया जा सकता है।
उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI को जिम्मेदारी सौंपने की मांग की। उनके मुताबिक, CBI जांच से ही मामले की वास्तविक सच्चाई सामने आ सकती है।
‘आरोपी स्वीकार कर रहा, सरकार फिर भी झुठला रही’
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मामले में अपराधी खुद पेपर लीक करने की बात स्वीकार कर रहा है, इसके बावजूद राज्य सरकार इसे मानने को तैयार नहीं है।
चंपाई सोरेन ने सवाल उठाया कि अगर मामले में गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं और आरोपी की ओर से भी स्वीकारोक्ति की बात कही जा रही है, तो फिर सरकार निष्पक्ष जांच से पीछे क्यों हट रही है।
‘सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने के डर से CBI जांच से पीछे?’
चंपाई सोरेन ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार को इस बात का डर है कि CBI जांच की आंच सत्ता के शीर्ष तक पहुंच सकती है। इसी वजह से राज्य सरकार CBI जांच की मांग से पीछे हट रही है।
हालांकि, ये सभी आरोप पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों पर सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
आंदोलन कर रहे युवाओं को लेकर सरकार पर निशाना
चंपाई सोरेन ने JPSC समेत रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे युवाओं का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जब न्याय की मांग करने पर युवाओं को लाठी मिलती है और राज्य का युवा हताश एवं निराश होकर आंदोलन के लिए मजबूर होता है, तो यह गंभीर स्थिति है।
उन्होंने विपक्ष को बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगाने की परंपरा और सत्ता के कथित तानाशाही रवैये पर भी सवाल उठाया।
लोहिया के बयान का किया जिक्र
अपने पोस्ट में चंपाई सोरेन ने समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया के चर्चित कथन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब सड़कें खामोश हो जाती हैं, तो सदन आवारा हो जाती है।
चंपाई सोरेन ने इसी संदर्भ में कहा कि जब जनता की आवाज नहीं सुनी जाती और युवा न्याय के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होते हैं, तब जनता का आंदोलन लोकतांत्रिक प्रतिरोध का माध्यम बन जाता है।
अब CBI जांच की मांग पर बढ़ेगा दबाव?
JPSC विवाद को लेकर सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच पहले से ही तनाव की स्थिति है। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के इस बयान के बाद CBI जांच की मांग को लेकर राजनीतिक दबाव और बढ़ सकता है। अब निगाहें सरकार की अगली प्रतिक्रिया और JPSC मामले की जांच की दिशा पर रहेंगी।
