बिहार में डोमिसाइल और पारदर्शिता लागू करने की मांग तेज़, 5 जून को होगा बड़ा आंदोलन
मुख्य बिंदु:
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बिहार स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष दिलीप कुमार ने डोमिसाइल और सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता की मांग को लेकर 5 जून को पटना में महा आंदोलन की घोषणा की।
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बिहार की सरकारी नौकरियों में पहले हक़दार बिहार के छात्रों को ही होना चाहिए, बाहरी अभ्यर्थियों को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए।
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बिहार में बीपीएससी टीआरई (शिक्षक भर्ती) सहित सभी सरकारी भर्ती परीक्षाओं में 90% डोमिसाइल लागू करने की मांग।
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सरकारी नौकरियों में 10% सीटें खुली रखी जाएं, ताकि बाहर के योग्य उम्मीदवार भी मेरिट के आधार पर चयनित हो सकें।
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बिहार से संबंधित प्रश्नों का एक अलग पेपर लेकर अप्रत्यक्ष रूप से भी डोमिसाइल लागू करने का प्रस्ताव।
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बिहार में फैक्ट्रियों की कमी के कारण सरकारी नौकरी ही रोजगार का मुख्य स्रोत है।
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बिहार में सरकारी नौकरियों की बहाली सबसे अधिक हो रही है, जिससे बाहरी उम्मीदवार भी बड़ी संख्या में भर्ती हो रहे हैं।
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बिहार सरकार से पारदर्शिता और डोमिसाइल लागू करने की अपील।
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5 जून को पटना कॉलेज से सुबह 10 बजे छात्रों का प्रदर्शन होगा।
बिहार में डोमिसाइल और पारदर्शिता को लेकर बढ़ती मांग
बिहार स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष और छात्र नेता दिलीप कुमार ने रविवार को पटना में प्रेस वार्ता कर 5 जून को संपूर्ण क्रांति दिवस पर डोमिसाइल और पारदर्शिता के लिए महा आंदोलन का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि बिहार की सरकारी नौकरियों पर पहला हक बिहारी छात्रों का है और बाहरी उम्मीदवारों को नौकरी में प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए। “वोट दे बिहारी और नौकरी पाए बाहरी” अब सहन नहीं किया जाएगा।
डोमिसाइल लागू न होने से बिहार के छात्रों को नुकसान
दिलीप कुमार ने बताया कि कई राज्यों में डोमिसाइल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लागू है, जिससे बिहार के छात्रों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ राज्यों की परीक्षाओं में उन राज्यों से संबंधित प्रश्न अधिक पूछे जाते हैं, जिससे बाहरी छात्रों को फायदा मिलता है। इसलिए बिहार में भी परीक्षाओं में डोमिसाइल लागू किया जाना आवश्यक है।
शिक्षा एवं अन्य सरकारी नौकरियों में डोमिसाइल लागू करने की मांग
दिलीप कुमार ने कहा कि बीपीएससी टीआरई (शिक्षक भर्ती) में प्राथमिक शिक्षा में 100% डोमिसाइल लागू हो क्योंकि बच्चों के लिए मातृभाषा में शिक्षा ज़रूरी है। साथ ही माध्यमिक, उच्चतर माध्यमिक, दारोगा, सिपाही, लाइब्रेरियन, बीएसएससी सहित बिहार की सभी सरकारी नौकरियों में कम से कम 90% डोमिसाइल लागू किया जाए। 10% सीटें खुली रहनी चाहिए, ताकि मेरिट के आधार पर बिहार के बाहर के अभ्यर्थी भी चुनें जा सकें।
सरकारी नौकरियां बिहार के लिए रोजगार का मुख्य स्रोत
उन्होंने कहा कि बिहार में रोजगार के विकल्प कम हैं, इसलिए सरकारी नौकरी युवाओं के लिए सबसे बड़ा रोजगार साधन है। बिहार में सरकारी भर्ती सबसे अधिक होती है, जिससे देश भर के अभ्यर्थी यहां आते हैं। इसलिए डोमिसाइल लागू न होने से स्थानीय छात्रों का नुकसान हो रहा है।
पारदर्शिता और न्यायसंगत चयन की मांग
दिलीप कुमार ने बिहार सरकार से सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और बिहार के छात्रों के हित में डोमिसाइल लागू करने की भी मांग की।
5 जून को पटना कॉलेज से महा आंदोलन
अंत में, दिलीप कुमार ने बताया कि बिहार के सभी जिलों से छात्र-छात्राएँ 5 जून को सुबह 10 बजे पटना कॉलेज में जमा होकर इस मांग को लेकर आंदोलन करेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्य नेताओं दीपक पाण्डेय, प्रियंका पटेल, रौशन, रवि दास, राजेश मालाकर, संतोष, सुमित आदि उपस्थित थे।
