रांची की डॉ. मेघा रानी ने रचा इतिहास, 120 मिनट में 120 पृष्ठ लिखकर बनाया विश्व रिकॉर्ड
रांची: झारखंड की राजधानी रांची की साहित्यकार, समाजसेविका और हिंदी लेखिका डॉ. मेघा रानी ने अपनी असाधारण लेखन क्षमता से विश्व स्तर पर नई पहचान बनाई है। उन्होंने 120 मिनट में 120 मौलिक हस्तलिखित पृष्ठ लिखकर विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने का दावा किया है। आवश्यक साक्ष्यों के सत्यापन के बाद उन्हें दुनिया की सबसे तेज गति से हिंदी हस्तलेखन करने वाली महिला के रूप में मान्यता मिलने की जानकारी दी गई है। इस उपलब्धि को झारखंड के लिए गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है।
प्रमुख बातें
- रांची की डॉ. मेघा रानी ने बनाया विश्व रिकॉर्ड
- 120 मिनट में लिखे 120 मौलिक हस्तलिखित पृष्ठ
- दुनिया की सबसे तेज हिंदी हस्तलेखन करने वाली महिला होने का दावा
- झारखंड के इतिहास, संस्कृति और विरासत पर आधारित है पूरी पांडुलिपि
- हस्तलिखित सामग्री जल्द पुस्तक के रूप में होगी प्रकाशित
120 मिनट में 120 पन्ने लिखकर रचा इतिहास
डॉ. मेघा रानी ने निर्धारित समय में 120 मौलिक हस्तलिखित पृष्ठ तैयार कर अपनी लेखन क्षमता का प्रदर्शन किया। बताया गया कि रिकॉर्ड से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच के बाद इस उपलब्धि को मान्यता प्रदान की गई।
झारखंड की संस्कृति को बनाया विषय
विश्व रिकॉर्ड के दौरान डॉ. मेघा रानी ने झारखंड के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और विरासत को पूरी तरह मौलिक रूप में हस्तलिखित किया। यही पांडुलिपि अब पुस्तक के रूप में प्रकाशित की जाएगी। इसके लिए 120 पृष्ठ प्रकाशन हेतु भेजे जा चुके हैं।
“यह रिकॉर्ड हिंदी और झारखंड को समर्पित”
इस उपलब्धि पर डॉ. मेघा रानी ने कहा कि यह विश्व रिकॉर्ड उनकी मातृभाषा हिंदी और जन्मभूमि झारखंड को समर्पित है। उन्होंने कहा कि लेखन के माध्यम से उन्होंने अपनी मिट्टी, संस्कृति और भावनाओं को शब्दों में अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि यदि उनकी उपलब्धि से युवा पीढ़ी और विशेषकर बेटियों को प्रेरणा मिलती है, तो यही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा।

सात वर्षों से लगातार कर रही हैं साहित्य साधना
डॉ. मेघा रानी पिछले सात वर्षों से नारी विमर्श, सामाजिक सरोकार और श्रीकृष्ण भक्ति जैसे विषयों पर निरंतर लेखन कर रही हैं। उनकी प्रमुख पुस्तकों में ‘शाश्वत सृजन’, ‘श्रीकृष्ण लीला’ और ‘अस्तित्व: एक नारी का’ शामिल हैं। उनकी पुस्तक ‘श्रीकृष्ण लीला’ को इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और OMG बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी स्थान मिल चुका है।
कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान से हो चुकी हैं सम्मानित
साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. मेघा रानी को कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वर्ष 2025 में उन्हें राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें मानद डॉक्टरेट, Stree One India Engaging Literature Award 2022, Indian Icon Awards 2023, International Golden Leadership Award 2023, Jharkhand Icon Awards 2023, Story Line India Achievers Award 2024, India National Award 2024, विश्व रत्न सम्मान, नारी सम्मान और कई अन्य राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दी बधाई
सोशल एक्टिविस्ट अनिल अमिताभ पन्ना ने डॉ. मेघा रानी को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि युवा लेखकों और बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
हिंदी और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बनी उपलब्धि
डॉ. मेघा रानी की यह उपलब्धि केवल एक विश्व रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंदी भाषा, झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और महिला सशक्तिकरण के प्रति उनके समर्पण का भी प्रतीक मानी जा रही है।

