JAC की कार्यप्रणाली पर वित्त रहित शिक्षा मोर्चा का बड़ा आरोप, हाईकोर्ट में PIL की तैयारी
18 माह से उपाध्यक्ष का पद खाली, 13 बोर्ड सदस्यों का कार्यकाल समाप्त; मोर्चा बोला—अधिनियम के अनुसार काम नहीं हुआ तो इसी सप्ताह दायर होगी जनहित याचिका
रांची: झारखंड अधिविध परिषद (JAC) की कार्यप्रणाली को लेकर वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मोर्चा ने आरोप लगाया है कि जैक में अधिनियम एवं नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप कई महत्वपूर्ण काम नहीं हो रहे हैं। इसके खिलाफ मोर्चा इसी सप्ताह झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी में है।
प्रमुख बातें
- JAC के उपाध्यक्ष का पद करीब 18 माह से खाली होने का दावा।
- 15 मई 2026 से 13 बोर्ड सदस्यों के पद रिक्त होने का आरोप।
- 19 सदस्यीय बोर्ड में केवल 5 सदस्य बचे होने की बात।
- कोरम पूरा नहीं होने से बोर्ड बैठक प्रभावित होने का दावा।
- वित्त एवं स्थापना समिति की बैठक करीब 6 माह से नहीं होने का आरोप।
- 50 से अधिक स्कूल-कॉलेजों की प्रस्वीकृति का मामला लंबित होने की बात।
- वित्त पदाधिकारी, एकेडमिक ऑफिसर और विशेष कार्य पदाधिकारी की नियुक्तियों पर भी सवाल।
- 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर लोक भवन के सामने अर्धनग्न प्रदर्शन की घोषणा।
JAC की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
मोर्चा का कहना है कि जैक में प्रस्वीकृति समिति और वित्त समिति की नियमित बैठक नहीं हो रही है। इसके अलावा सीटों के निर्धारण, शासी निकाय के गठन और अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को भी नियमों के अनुरूप नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
मोर्चा के अनुसार, परीक्षकों की नियुक्ति और मॉडरेशन बोर्ड के गठन जैसे परीक्षा संबंधी कार्यों में भी जैक अधिनियम, नियमावली और परीक्षा नियमावली का पालन नहीं किया जा रहा है।
19 में सिर्फ 5 सदस्य, कोरम पर भी सवाल
मोर्चा ने दावा किया कि जैक बोर्ड में कुल 19 सदस्यों में से वर्तमान में केवल 5 सदस्य ही बचे हैं। वहीं, 15 मई 2026 से 13 सदस्यों के पद रिक्त बताए जा रहे हैं। करीब 18 माह से उपाध्यक्ष का पद भी खाली है।
मोर्चा का आरोप है कि पर्याप्त सदस्यों के अभाव में बोर्ड का कोरम पूरा नहीं हो रहा है, जिससे नीतिगत निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
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वित्त और स्थापना समिति की बैठक पर सवाल
संघर्ष मोर्चा के मुताबिक जैक की वित्त समिति और स्थापना समिति की बैठक पिछले करीब छह महीने से नहीं हुई है। इसके कारण नए पाठ्यक्रम और सिलेबस में आवश्यक बदलाव भी नहीं हो पा रहे हैं।
मोर्चा ने कहा कि प्रस्वीकृति के मामलों के लंबित रहने से स्कूल-कॉलेजों के प्राचार्य, शिक्षक और कर्मचारी परेशान हैं और लगातार जैक कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं।
तीन अधिकारियों की नियुक्ति पर भी उठे सवाल
मोर्चा ने जैक के वित्त पदाधिकारी, एकेडमिक ऑफिसर और विशेष कार्य पदाधिकारी की नियुक्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका दावा है कि नियुक्ति के समय संबंधित पदों के लिए अधिनियम में निर्धारित योग्यता पूरी नहीं होने के बावजूद इन अधिकारियों की नियुक्ति की गई और वे करीब 10 वर्षों से जैक में कार्यरत हैं।
मोर्चा का कहना है कि यह मामला विधानसभा में भी तीन बार उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक इन अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई नहीं हुई।
2023 के हाईकोर्ट आदेश का दिया जा रहा हवाला
मोर्चा के अनुसार, संबंधित अधिकारियों को नहीं हटाने के पीछे 2023 में हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया जा रहा है। मोर्चा का दावा है कि उस आदेश में जैक को छह सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल करने को कहा गया था और तब तक अधिकारियों को नहीं हटाने की स्थिति बनी थी।
मोर्चा का आरोप है कि उस आदेश के बाद भी अब तक मामले का उचित समाधान नहीं किया गया है।
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नियुक्ति रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल
संघर्ष मोर्चा ने दावा किया कि वित्त पदाधिकारी, एकेडमिक ऑफिसर और विशेष कार्य पदाधिकारी की नियुक्ति से संबंधित महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जैक में उपलब्ध नहीं हैं।
मोर्चा ने सवाल उठाया कि नियुक्ति प्रक्रिया में कितने अभ्यर्थी साक्षात्कार में शामिल हुए, चयन समिति की क्या अनुशंसा थी और नियुक्ति प्रक्रिया किस आधार पर पूरी की गई—इनसे संबंधित रिकॉर्ड भी स्पष्ट नहीं हैं।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने का फैसला
इन तमाम आरोपों के आधार पर वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने अब हाईकोर्ट का रुख करने का निर्णय लिया है। मोर्चा ने कहा है कि अगर जैक अधिनियम और नियमावली के अनुसार काम नहीं करता तथा संबंधित अधिकारियों को नहीं हटाया जाता है, तो इसी सप्ताह जनहित याचिका दायर की जाएगी।
75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि समेत कई मांगें
मोर्चा ने कहा कि उसकी लड़ाई केवल जैक की कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं है। 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि के संलेख पर अब तक कैबिनेट की सहमति नहीं मिलने का भी मुद्दा उठाया गया है।
इसके अलावा कार्मिक विभाग के पत्र पर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने और सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना को लेकर सदन में दिए गए आश्वासन के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर भी मोर्चा ने नाराजगी जताई।
मोर्चा के मुताबिक स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में भी पिछले छह महीने से लगभग 30 स्कूल-कॉलेजों की प्रस्वीकृति के मामले लंबित हैं।
5 सितंबर को लोक भवन के सामने अर्धनग्न प्रदर्शन
इन मांगों को लेकर मोर्चा ने शिक्षक दिवस, 5 सितंबर को लोक भवन के सामने अर्धनग्न प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए मोर्चा के प्रतिनिधियों का दौरा 18 अगस्त से शुरू होने की जानकारी दी गई है।
यह निर्णय चारों घटक संगठनों के पदाधिकारियों की बैठक में लिया गया। बैठक के फैसलों की जानकारी प्रेस को मनीष कुमार ने दी।
बैठक में ये पदाधिकारी रहे मौजूद
बैठक में रघुनाथ सिंह, फजलुल कदीर अहमद, चंदेश्वर पाठक, देवनाथ सिंह, गणेश महतो, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, अरविंद सिंह, नरोत्तम सिंह, मनीष कुमार, मनोज तिर्की, अनिल तिवारी, रघु विश्वकर्मा और विनय उरांव समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
नोट: जैक से संबंधित नियुक्तियों, बोर्ड की मौजूदा संरचना और हाईकोर्ट के 2023 के आदेश से जुड़े दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध सामग्री के आधार पर नहीं की गई है।
