जयराम महतो ने रिम्स विवाद में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का बचाव किया

“इरफान अंसारी का बचाव कर अधिकारियों पर बरसे जयराम महतो”

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रिम्स विवाद: जयराम महतो ने किया स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का बचाव, अधिकारियों पर उठाए सवाल

रांची- झारखंड की राजधानी रांची स्थित Rajendra Institute of Medical Sciences (रिम्स) एक बार फिर विवादों में है। डुमरी विधायक Jairam Mahato ने अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। खासतौर पर बर्न वार्ड में AC बंद रहने की बात सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

जयराम महतो ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल गरीबों की आखिरी उम्मीद होता है, लेकिन यहां मरीजों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर किसी मरीज की “पहुंच” या “पैरवी” नहीं हो, तो उसे इलाज के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

बर्न वार्ड को लेकर बड़ा आरोप

विधायक ने कहा कि बर्न वार्ड जैसे संवेदनशील यूनिट में AC का बंद होना बेहद गंभीर मामला है। जले हुए मरीजों के लिए नियंत्रित तापमान बेहद जरूरी होता है, ऐसे में AC खराब रहने से उनकी पीड़ा और बढ़ जाती है। उन्होंने इसे “दुखद ही नहीं बल्कि शर्मनाक” बताया।

जयराम महतो ने यह भी कहा कि कई वार्डों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उनका मानना है कि जिम्मेदार अधिकारियों को मरीजों की तकलीफ का एहसास कराने के लिए उनके कार्यालय और आवास के AC भी कुछ दिनों के लिए बंद कर दिए जाने चाहिए।

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स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का किया बचाव

इस पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जयराम महतो ने सीधे स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari को जिम्मेदार नहीं ठहराया। उन्होंने कहा कि हर समस्या के लिए केवल मंत्री को दोष देना सही नहीं है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा,

“आखिर अधिकारी किस काम के लिए हैं?”

उनका आरोप था कि कई बार विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन नहीं करते, जिसका खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ता है।

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स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

रिम्स जैसे बड़े सरकारी अस्पताल की स्थिति को लेकर उठे इन सवालों ने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है। निजी अस्पतालों की महंगी चिकित्सा और सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी के बीच गरीब मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

अब देखना होगा कि इस मामले में सरकार और अस्पताल प्रशासन क्या कदम उठाते हैं।

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