झारखंड के 65 कॉलेजों के शिक्षक-कर्मचारी आर्थिक संकट में, दो महीने से नहीं मिला मानदेय; समायोजन की मांग तेज
रांची/जमशेदपुर: झारखंड सरकार द्वारा महाविद्यालयों में संचालित इंटरमीडिएट की पढ़ाई को चरणबद्ध तरीके से प्लस-टू विद्यालयों में स्थानांतरित किए जाने के बाद राज्य के 65 अंगीभूत महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारी गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। प्रभावित शिक्षक एवं कर्मचारियों का कहना है कि समायोजन नहीं होने और पिछले दो महीनों से मानदेय बंद होने के कारण उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
प्रमुख बातें
- 65 अंगीभूत कॉलेजों के शिक्षक-कर्मचारी आर्थिक संकट में
- पिछले दो महीनों से नहीं मिला मानदेय
- इंटरमीडिएट की पढ़ाई प्लस-टू स्कूलों में होने से बढ़ी समस्या
- समायोजन की मांग को लेकर सरकार से कई बार गुहार
- मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद निर्णय का इंतजार
इंटर की पढ़ाई स्थानांतरित होने के बाद बढ़ी परेशानी
झारखंड सरकार ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई को चरणबद्ध तरीके से महाविद्यालयों से प्लस-टू विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया है। इसके बाद वर्षों से महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारियों के समायोजन पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि छात्र अब प्लस-टू विद्यालयों में नामांकन ले रहे हैं, लेकिन उनकी सेवा और भविष्य अधर में लटक गया है।
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दो महीने से मानदेय नहीं मिलने का आरोप
शिक्षकों एवं कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें पिछले दो महीनों से मानदेय नहीं मिला है। पहले शिक्षकों को लगभग 12 हजार रुपये, तृतीय वर्गीय कर्मचारियों को 8 हजार रुपये और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को 6 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता था।
मानदेय बंद होने से कई परिवार आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं और कर्मचारियों ने गंभीर वित्तीय संकट की बात कही है।
सरकार से समायोजन की मांग
प्रभावित शिक्षक एवं कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से सरकार से समायोजन की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री को कई बार पत्र भेजे गए, सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी मांग उठाई गई और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर समाधान की अपील की गई।
उन्होंने बताया कि पूर्व में मंत्री रामदास सोरेन ने भी प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया था कि सरकार इस मामले पर विचार कर रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया।
मुख्यमंत्री के आश्वासन का किया उल्लेख
कर्मचारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से यह आश्वासन दिया था कि किसी भी शिक्षक या कर्मचारी को बेरोजगार नहीं होने दिया जाएगा। इसके बावजूद समायोजन की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से उनमें निराशा बढ़ती जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री से मिलने का कई बार प्रयास किया गया, लेकिन अब तक मुलाकात नहीं हो सकी।
संसाधनों के उपयोग पर भी उठाए सवाल
शिक्षक एवं कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वर्षों तक कम मानदेय पर कार्य कराने से संस्थानों में करोड़ों रुपये की बचत हुई, लेकिन उन संसाधनों के उपयोग को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि इस संबंध में शिकायतें भी की गईं, फिर भी शिक्षा विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब प्रभावित शिक्षक एवं कर्मचारी सरकार से जल्द समायोजन की प्रक्रिया पूरी करने और लंबित मानदेय का भुगतान करने की मांग कर रहे हैं।
