MMDR पर बड़ा टकराव! टैक्स, खनिज और ₹1.36 लाख करोड़ का पूरा विवाद

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MMDR कानून पर झारखंड में सियासी घमासान, अन्नपूर्णा देवी का बड़ा हमला—“विरोध के पीछे क्या है वजह?”

रांची: झारखंड में MMDR Amendment Act 2026 को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच सियासी टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने संशोधित कानून के फायदे गिनाते हुए झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार MMDR कानून का विरोध कर अवैध खनन और कोयला चोरी को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था को बचाना चाहती है। हालांकि, यह अन्नपूर्णा देवी का राजनीतिक आरोप है; राज्य सरकार MMDR संशोधन को लेकर अपनी अलग आपत्तियां पहले ही सार्वजनिक कर चुकी है।

प्रमुख बातें

  • अन्नपूर्णा देवी ने MMDR संशोधन को लेकर झारखंड सरकार पर हमला बोला
  • मंत्री ने दावा किया कि कानून से खनन क्षेत्र में टैक्स व्यवस्था अधिक एकरूप और पारदर्शी होगी
  • केंद्र सरकार का कहना है कि संशोधन से निवेश, उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा
  • झारखंड सरकार इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर चुकी है
  • राज्य सरकार का दावा है कि कानून से उसके खनिज राजस्व और अधिकार प्रभावित होंगे
  • MMDR Amendment Act 2026 के प्रावधान 22 अगस्त 2026 से लागू हो चुके हैं

“झारखंड में नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे”

प्रेसवार्ता में अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और MMDR कानून में बदलाव से राज्य में नए निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। उनके मुताबिक खनन क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ने से रोजगार के अवसर पैदा होंगे और झारखंड के युवाओं को अपने राज्य में ही काम मिलने की संभावना बढ़ेगी।

उन्होंने दावा किया कि इससे रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर होने वाले पलायन को भी कम करने में मदद मिल सकती है।

केंद्र सरकार भी संशोधित कानून को खनन क्षेत्र में एक समान और अधिक पूर्वानुमेय वित्तीय व्यवस्था बनाने वाला कदम बता रही है। PIB के अनुसार, संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र में स्थिर और एकरूप वित्तीय ढांचा तैयार करना तथा निवेश और उत्पादन को बढ़ावा देना है।

टैक्स और सेस को लेकर क्या है विवाद?

अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि खनन क्षेत्र में अलग-अलग प्रकार के टैक्स, सेस और शुल्क को लेकर कारोबारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि नीलामी के बाद राज्य स्तर पर अलग-अलग प्रकार के कर और सेस लगाए जाने से खनन कारोबार में अनिश्चितता बढ़ती थी।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार संशोधित व्यवस्था का उद्देश्य इसी तरह की अनिश्चितता को कम करना और देशभर में खनिज क्षेत्र के लिए अधिक समान वित्तीय ढांचा तैयार करना है।

PIB के मुताबिक, वर्तमान में राज्यों को खनन से रॉयल्टी, ऑक्शन प्रीमियम, डेड रेंट, DMF भुगतान, GST और ट्रांजिट फीस समेत करीब 14 तरह के कर, शुल्क और अन्य मदों से राजस्व प्राप्त होता है। केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि 2025-26 में राज्यों को खनिज क्षेत्र से करीब ₹1,14,549.28 करोड़ का राजस्व मिला और कुल खनन राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत राज्यों के पास जाता है।

MMDR कानून में आखिर बदला क्या है?

Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2026 ने 1957 के मूल MMDR कानून में कई बदलाव किए हैं। संशोधन में mineral-bearing land यानी खनिजयुक्त भूमि को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है।

सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में नया Section 9D शामिल है। केंद्र सरकार की ओर से जारी विवरण के मुताबिक, राज्यों द्वारा mineral rights और mineral-bearing lands पर नए टैक्स, सेस या इसी तरह की लेवी लगाने पर कुछ केंद्रीय शर्तें और सीमाएं लागू की गई हैं।

संशोधित कानून को 17 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और 22 अगस्त को केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद इसके प्रावधान लागू हो गए।

अन्नपूर्णा देवी ने लगाया गंभीर आरोप

प्रेसवार्ता के दौरान केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार पर और भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार वैधानिक तरीके से खनन से राजस्व हासिल करने के बजाय ऐसी व्यवस्था चाहती है जिसमें सरकारी खजाने को नुकसान हो और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिले।

उन्होंने आरोप लगाया कि MMDR कानून का विरोध कोयला चोरी और अवैध माइनिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

यह आरोप भाजपा की ओर से लगाया गया है और इसे तथ्य के रूप में नहीं बल्कि केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए। झारखंड सरकार ने MMDR संशोधन के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने की घोषणा की है और उसके नेताओं ने कानून को राज्य के अधिकारों और राजस्व से जोड़कर आपत्ति जताई है।

झारखंड सरकार क्यों कर रही है विरोध?

MMDR संशोधन को लेकर झारखंड सरकार का विरोध मुख्य रूप से खनिज राजस्व और राज्य के अधिकारों से जुड़ा है।

झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सितंबर में कहा था कि राज्य सरकार संशोधित कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। उनके अनुसार, कानून के कारण केंद्र से खनिज सेस और अन्य मदों से जुड़े राज्य के करीब ₹1.36 लाख करोड़ के दावे पर असर पड़ा है।

इस मामले में अब विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार ने कानून को अदालत में चुनौती देने की दिशा में कदम बढ़ाने की बात कही है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में इस कानून के संवैधानिक और वित्तीय प्रभाव पर कानूनी बहस भी महत्वपूर्ण होगी।

भाजपा का दावा—“विकसित झारखंड” को मिलेगी मजबूती

अन्नपूर्णा देवी ने MMDR संशोधन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि इसका फायदा सिर्फ केंद्र को नहीं बल्कि राज्यों को भी मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि खनिज क्षेत्र में निवेश बढ़ने से उद्योग, रोजगार और उत्पादन को गति मिल सकती है। उनका दावा है कि इससे ‘विकसित भारत’ के साथ ‘विकसित झारखंड’ के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।

केंद्र सरकार भी संशोधन को निवेश, उत्पादन, रोजगार, ऊर्जा सुरक्षा और खनिज सुरक्षा से जोड़कर देख रही है। PIB ने इसे खनन क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और पूर्वानुमेय व्यवस्था बनाने वाला कदम बताया है।

दूसरी तरफ झारखंड में विरोध जारी

वहीं झारखंड में MMDR संशोधन के खिलाफ झामुमो ने आंदोलन भी किया है। सितंबर में पार्टी की ओर से राज्य के विभिन्न प्रखंडों में प्रदर्शन किए गए। पार्टी ने खनिज उत्पादक राज्यों के वित्तीय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा पुराने खनन बकाये के भुगतान जैसे मुद्दे उठाए।

इससे साफ है कि MMDR संशोधन अब झारखंड की राजनीति में केंद्र बनाम राज्य अधिकारों की बहस का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है।

कोयला चोरी के मुद्दे पर भी बढ़ी कार्रवाई

दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान झारखंड के कोयला क्षेत्रों में अवैध खनन और कोयला चोरी के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई भी तेज हुई है। 24 सितंबर को CISF ने CCL के एक क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए करीब 250 टन कोयला बरामद किया था। यह कार्रवाई कोयला चोरी और अवैध भंडारण के खिलाफ की गई थी।

हालांकि, इस तरह की कार्रवाई को सीधे MMDR कानून के राजनीतिक विवाद से जोड़ना उचित नहीं होगा। दोनों मुद्दे अलग-अलग प्रशासनिक और राजनीतिक संदर्भों में देखे जाने चाहिए।

अब आगे क्या?

MMDR Amendment Act 2026 लागू हो चुका है, लेकिन झारखंड सरकार इसके प्रावधानों को अदालत में चुनौती देने की तैयारी में है। दूसरी ओर भाजपा और केंद्र सरकार कानून को खनन क्षेत्र में निवेश, पारदर्शिता और एकरूपता बढ़ाने वाला सुधार बता रहे हैं।

इसलिए आने वाले समय में इस विवाद के तीन बड़े पहलू महत्वपूर्ण होंगे—राज्य के खनिज राजस्व पर असर, खनन कारोबार और निवेश पर प्रभाव तथा सुप्रीम कोर्ट में कानून को दी जाने वाली चुनौती।

फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी तेज है, लेकिन कानून का वास्तविक दीर्घकालिक असर राजस्व आंकड़ों, निवेश, खनन गतिविधियों और न्यायिक फैसलों के बाद ज्यादा स्पष्ट होगा।

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