राज्यपाल संतोष गंगवार को जुलाई की अंतरराष्ट्रीय हिंदी गोष्ठी में आमंत्रण.

झारखंड/बिहार विधानसभा चुनाव

हिंदी साहित्य भारती प्रतिनिधि मंडल की राज्यपाल से मुलाकात, अंतरराष्ट्रीय गोष्ठी में आमंत्रण सौंपा
झारखंड में जुलाई में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हिंदी गोष्ठी को लेकर राजभवन पहुंचा प्रतिनिधिमंडल, साहित्यिक पुस्तकों से हुआ सम्मान


मुख्य बिंदु:

  • हिंदी साहित्य भारती के प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल संतोष गंगवार से की शिष्टाचार भेंट

  • जुलाई में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि बनने का दिया आमंत्रण

  • राज्यपाल को भेंट की गईं तीन साहित्यिक कृतियाँ और पारंपरिक साल

  • मुलाकात को संस्था ने झारखंड की साहित्यिक गरिमा के लिए बताया ऐतिहासिक क्षण



रांची- हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार और संवर्धन में समर्पित संस्था हिंदी साहित्य भारती के झारखंड प्रदेश प्रतिनिधि मंडल ने आज राज्यपाल संतोष गंगवार से राजभवन में शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर संस्था की ओर से जुलाई माह में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य गोष्ठी में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया।

डॉ. अरुण सज्जन के नेतृत्व में मिला प्रतिनिधिमंडल
प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण सज्जन ने किया। उन्होंने महामहिम को कार्यक्रम का आमंत्रण पत्र सौंपते हुए इस भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आग्रह किया। डॉ. सज्जन ने बताया कि यह आयोजन हिंदी साहित्य को वैश्विक मंच देने की दिशा में एक अहम प्रयास होगा।

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राज्यपाल को भेंट की गईं साहित्यिक कृतियाँ
इस विशेष अवसर पर हिंदी साहित्य भारती की ओर से महामहिम को तीन विशिष्ट साहित्यिक कृतियाँ और एक पारंपरिक साल भेंट स्वरूप प्रदान किया गया। इस सम्मान gesture को महामहिम ने सराहते हुए संस्था के प्रयासों की प्रशंसा की।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे साहित्यिक पदाधिकारी
इस प्रतिनिधि मंडल में संस्था के रांची जिला अध्यक्ष बलराम पाठक, संगठन महामंत्री अजय राय, और उपाध्यक्ष संजय सराफ भी उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने राज्यपाल को संस्था के कार्यों और उद्देश्यों से अवगत कराया।

संस्था के लिए गर्व का क्षण
संस्था ने इस शिष्टाचार भेंट को अपनी एक साहित्यिक उपलब्धि के रूप में देखा है। प्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि यह मुलाकात आने वाले समय में झारखंड की साहित्यिक पहचान को देश-विदेश तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगी।

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