परीक्षाएं रद्द होने से हजारों युवाओं का भविष्य संकट में, जिम्मेदार कौन और कार्रवाई कब?
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच सरकार ने कई परीक्षाओं को रद्द करने और कुछ को स्थगित रखने का फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले से जहां परीक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी है, वहीं पहले की परीक्षाओं से नियुक्त हुए या चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रमुख बातें
11वीं–13वीं JPSC परीक्षा से करीब 342 अधिकारियों की नियुक्ति हुई थी।
FRO के 54 पदों पर नियुक्तियां हुई थीं।
CDPO के 63 पदों और महिला पर्यवेक्षिका के 237 पदों पर चयन हुआ था।
JSSC CGL से 1932 युवाओं की नियुक्ति हुई थी।
सरकार ने TDPL से जुड़ी कई वर्तमान परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है।
पुरानी परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच CID से कराने का निर्णय लिया गया है।
JSSC CGL परीक्षा को SIT जांच और CID के निष्कर्षों के आधार पर रद्द किया गया है।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए निगरानी प्रकोष्ठ और विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला लिया गया है।
एक गलती का खामियाजा कितने युवाओं को?
भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों का समाधान समय रहते नहीं होने का आरोप अब सरकार और संबंधित भर्ती संस्थाओं पर लगाया जा रहा है। सवाल यह है कि अगर किसी परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत पहले से सामने आ रही थी, तो उस समय कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
आज स्थिति यह है कि कुछ युवा पहले परीक्षा और नियुक्ति को लेकर परेशान थे, जबकि अब उन परीक्षाओं के रद्द होने या जांच के दायरे में आने से दूसरे अभ्यर्थियों के सामने भविष्य का संकट खड़ा हो गया है।
किन भर्तियों पर पड़ा असर?
उपलब्ध विवरण के अनुसार, 11वीं–13वीं JPSC परीक्षा से 342 अधिकारियों की नियुक्ति हुई थी। इसके अलावा FRO के 54, CDPO के 63 और महिला पर्यवेक्षिका के 237 पदों पर भी चयन हुआ था।
वहीं JSSC CGL के माध्यम से 1932 युवाओं की नियुक्ति हुई थी। CGL परीक्षा को रद्द किए जाने के बाद इन नियुक्तियों और अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।
हालांकि, किसी नियुक्ति के कानूनी रूप से समाप्त होने या कर्मचारियों की सेवा पर अंतिम प्रभाव का निर्धारण संबंधित सरकारी आदेश और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
सरकार ने किन प्रमुख परीक्षाओं को रद्द किया?
सरकार के फैसले के अनुसार TDPL से जुड़ी कई वर्तमान परीक्षाओं को रद्द किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
विश्वविद्यालयों में नॉन-टीचिंग पदों की भर्ती — विज्ञापन संख्या 09/2025
सहायक निदेशक/वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी — विज्ञापन संख्या 10/2025 और 11/2025
ड्रग इंस्पेक्टर — विज्ञापन संख्या 12/2025
सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर — विज्ञापन संख्या 02/2026
सरकारी पॉलिटेक्निक एवं महिला पॉलिटेक्निक में लेक्चरर — विज्ञापन संख्या 03/2026 और 04/2026
मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट सहायक प्रोफेसर — विज्ञापन संख्या 07/2026
इसके अलावा सिविल जज (जूनियर डिवीजन), सहायक वन संरक्षक, वन रेंज अधिकारी, सहायक लोक अभियोजक, झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2025 तथा 2023 बैकलॉग जैसी परीक्षाओं को भी रद्द करने का निर्णय लिया गया है।
फूड सेफ्टी ऑफिसर, चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर और संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2023 भी रद्द की गई हैं।
कुछ परीक्षाएं अगले आदेश तक स्थगित
जिन परीक्षाओं का प्रारंभिक कार्य TDPL के अलावा किसी अन्य एजेंसी ने किया था, उन्हें भी अगले आदेश तक स्थगित रखा गया है।
इनमें फूड एनालिस्ट, डिप्टी डायरेक्टर (प्रॉसीक्यूशन), प्रोजेक्ट मैनेजर, फैक्ट्री इंस्पेक्टर, बॉयलर इंस्पेक्टर और डायरेक्टर की भर्तियां शामिल हैं।
इन एजेंसियों के क्रेडेंशियल्स की जांच CID को सौंपी गई है।
पुरानी परीक्षाओं की भी होगी जांच
सरकार ने पुरानी परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने का भी फैसला लिया है। जांच के दायरे में 5वीं संयुक्त सिविल सेवा भर्ती (2013), सिविल जज भर्ती, मृदा संरक्षण अधिकारी, कृषि अधिकारी, फूड सेफ्टी ऑफिसर, डेंटिस्ट, भूविज्ञानी-रसायनज्ञ, सहायक अभियंता और डेंटल डॉक्टर सहित कुल 17 परीक्षाएं शामिल हैं।
आंशिक रूप से TDPL या अन्य विवादित एजेंसी से जुड़ी 6वीं लिमिटेड डिप्टी कलेक्टर भर्ती (11/2018) और झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट 2024 (08/2025) को भी रद्द किया गया है।
JSSC CGL भी रद्द
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा यानी JSSC CGL, विज्ञापन संख्या 10/2023, को भी SIT की जांच और CID के निष्कर्षों के आधार पर रद्द किया गया है।
यह फैसला हजारों अभ्यर्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि परीक्षा के जरिए बड़ी संख्या में युवाओं को सरकारी नौकरी मिली थी।
अब सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?
परीक्षाओं में अनियमितता हुई तो इसकी जिम्मेदारी तय करना भी उतना ही जरूरी है, जितना परीक्षा को रद्द करना।
युवाओं का सवाल है कि यदि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की जाती, तो क्या आज इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता?
एक कथित गलती को छिपाने या उस पर समय रहते कार्रवाई नहीं करने की कीमत आखिर कितने युवाओं को चुकानी पड़ेगी?
कुछ लोग पहले परीक्षा और नियुक्ति के लिए दुखी थे, कुछ अब नौकरी और भविष्य को लेकर दुखी हैं। सवाल सिर्फ इतना है—इनकी आह कौन लेगा और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी?
परीक्षा सुधार के लिए सरकार के तीन बड़े फैसले
मंत्रिपरिषद ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए तीन महत्वपूर्ण कदम उठाने का फैसला किया है:
1. फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग
JPSC और JSSC में अनियमितता एवं कदाचार से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध उच्च न्यायालय से किया जाएगा।
2. आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ
JPSC और JSSC में आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा, ताकि परीक्षा प्रक्रिया पर बेहतर निगरानी रखी जा सके।
3. परीक्षा सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति
परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए अमिताभ कौशल (IAS) की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति में अन्य अधिकारियों के साथ प्रतिष्ठित संस्थानों के निदेशक भी सदस्य होंगे। समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है।
युवाओं के सामने अब दोहरी चुनौती
परीक्षा रद्द होने से एक तरफ उन अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है जो कथित अनियमितता के कारण निष्पक्ष परीक्षा की मांग कर रहे थे। दूसरी तरफ, पहले से चयनित और नियुक्त युवाओं के भविष्य को लेकर असमंजस पैदा हो गया है।
इसलिए अब सिर्फ परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। जरूरत इस बात की है कि दोषी व्यक्तियों और संस्थाओं की जिम्मेदारी तय हो, जांच समयबद्ध तरीके से पूरी हो और प्रभावित युवाओं के भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति सामने आए।
