झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ सीता सोरेन का सीएम हेमंत सोरेन को पत्र, बोलीं- छोटे बिचौलियों के पीछे बड़े आकाओं की भी हो जांच
झारखंड की पूर्व विधायक एवं भाजपा नेत्री सीता सोरेन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य में कथित तौर पर बढ़ते भ्रष्टाचार और अवैध कारोबार को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे कथित भ्रष्टाचार सिंडिकेट की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
प्रमुख बातें
- सीता सोरेन ने सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
- अभय तिवारी जैसे कथित बिचौलियों का जिक्र करते हुए बड़े आकाओं की भूमिका की जांच की मांग की।
- अवैध बालू-पत्थर उत्खनन और कोयला तस्करी का मुद्दा उठाया।
- अधिकारियों की कथित मिलीभगत की भी जांच की मांग।
- स्वतंत्र जांच समिति या निष्पक्ष एजेंसी गठित करने की अपील।
‘छोटे बिचौलिए अकेले काम नहीं कर रहे’
सीता सोरेन ने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में कहा कि झारखंड के लगभग हर सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार अपनी जड़ें जमा चुका है। उन्होंने अभय तिवारी जैसे बिचौलियों और दलालों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे लोग सरकारी तंत्र को अंदर से कमजोर कर रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि छोटे स्तर के बिचौलिए अकेले इस तरह का नेटवर्क कैसे चला सकते हैं। उनका आरोप है कि इनके पीछे शासन और प्रशासन में बैठे प्रभावशाली लोगों का संरक्षण हो सकता है। सीता सोरेन ने मांग की कि जांच केवल छोटे स्तर के लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि कथित रूप से संरक्षण देने वाले बड़े लोगों की भूमिका भी सामने लाई जाए।
अवैध खनन और कोयला तस्करी का मुद्दा उठाया
पूर्व विधायक ने पत्र में अवैध खनन और कोयला तस्करी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नदियों से बिना अनुमति बालू और पहाड़ों से पत्थरों के उत्खनन के साथ-साथ अवैध कोयला खदानों और परिवहन के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से सरकार को टैक्स और रॉयल्टी के रूप में मिलने वाले राजस्व को नुकसान पहुंचता है। साथ ही, उन्होंने कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत की भी जांच कराने की मांग की।
उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग
सीता सोरेन ने मुख्यमंत्री से पूरे कथित सिंडिकेट की पहचान के लिए उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच समिति या निष्पक्ष जांच एजेंसी गठित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जांच का दायरा छोटे बिचौलियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके पीछे मौजूद कथित प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों की भूमिका भी जांची जानी चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने सभी सरकारी विभागों में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कड़े नियम लागू करने की मांग की।
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‘भ्रष्टाचार मुक्त झारखंड की दिशा में उठाएं कदम’
सीता सोरेन ने कहा कि झारखंड की जनता ने पारदर्शी और जवाबदेह सरकार के लिए जनादेश दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करने की अपील की और भ्रष्टाचार मुक्त झारखंड की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।
