Ranchi University Result

‘रांची विश्वविद्यालय की देरी से PG प्रवेश से वंचित हो रहे हैं छात्र’

झारखंड/बिहार रोज़गार समाचार

रांची विश्वविद्यालय में परीक्षा परिणाम में देरी से छात्राएं PG प्रवेश से वंचित, अफ़ज़ल दुर्रानी ने उठाई आवाज़

मुख्य बिंदु:

  • वोकेशनल कोर्स (2022–25) की छात्राएं अंतिम सेमेस्टर के रिजल्ट विलंब से PG में प्रवेश से वंचित

  • अफ़ज़ल दुर्रानी ने रांची विश्वविद्यालय, राज्यपाल और UGC को लिखा पत्र

  • संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के उल्लंघन का आरोप

  • जनहित याचिका दायर करने की चेतावनी

  • प्रोविजनल एडमिशन और समयबद्ध शैक्षणिक कैलेंडर की मांग



परीक्षा परिणाम में देरी से छात्राओं का भविष्य अधर में

रांची, 14 जुलाई 2025रांची विश्वविद्यालय के वोकेशनल कोर्स (सत्र 2022–25) की छात्राओं को अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा और परिणाम में हो रही देरी के कारण देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में पीजी (PG) में प्रवेश से वंचित होना पड़ रहा है। इससे न केवल छात्राओं का करियर प्रभावित हो रहा है, बल्कि वे मानसिक तनाव, आर्थिक दबाव और सामाजिक असुरक्षा जैसी समस्याओं से भी जूझ रही हैं।

अफ़ज़ल दुर्रानी ने उठाई आवाज़, कुलपति और राज्यपाल को भेजा ज्ञापन

ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (AISF) के राज्य कार्यकारिणी सदस्य अफ़ज़ल दुर्रानी ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर रांची विश्वविद्यालय के कुलपति, राज्यपाल एवं यूजीसी को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि विश्वविद्यालय तुरंत हस्तक्षेप कर परिणाम जारी करे ताकि छात्राएं पीजी में दाखिला ले सकें।

‘पलामू में अब लिखित परीक्षा के आधार पर होगी चतुर्थ वर्गीय नियुक्ति’

“फाइलों की तरह धूल खा रहा छात्राओं का भविष्य” — दुर्रानी

प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अफ़ज़ल दुर्रानी ने कहा,

“छात्राओं का भविष्य विश्वविद्यालय के गलियारों में फाइलों की तरह धूल खा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की निष्क्रियता हज़ारों बेटियों के करियर को निगल रही है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब छात्राएं जानकारी लेने विश्वविद्यालय पहुंचती हैं, तो उन्हें अनदेखा कर दिया जाता है — जैसे वे अपने अधिकार नहीं, किसी एहसान की मांग कर रही हों।

संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन

दुर्रानी ने कहा कि यह पूरा मामला संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और शिक्षा का अधिकार) का खुला उल्लंघन है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विश्वविद्यालय प्रशासन तत्काल कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तो वे झारखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे।

राज्यपाल और UGC से की ये दो बड़ी मांगें

  1. प्रोविजनल एडमिशन की सुविधा: जब तक परीक्षा परिणाम नहीं आते, छात्राओं को पीजी में अस्थायी प्रवेश की सुविधा दी जाए।

  2. समयबद्ध अकादमिक कैलेंडर: UGC एक सख्त और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।

रांची विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जहाँ देश के प्रमुख विश्वविद्यालय समय पर दाखिला प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं, वहीं यहां की छात्राएं केवल परिणाम का इंतज़ार करते हुए अपने सपनों को टुटता देख रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *