निशा भगत की मौत पर बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला, CBI जांच की मांग; मुख्यमंत्री से मांगा इस्तीफा
झारखंड में निशा भगत की मौत का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री, विधायक कल्पना सोरेन और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने निशा भगत की मौत से जुड़े पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने, संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और जांच पूरी होने तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पद छोड़ने की मांग की है।
प्रमुख बातें
- बाबूलाल मरांडी ने निशा भगत की मौत को लेकर हेमंत सरकार पर सवाल उठाए।
- मुख्यमंत्री और विधायक कल्पना सोरेन से जवाब मांगा।
- अजय तिर्की पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की।
- निशा के थाना प्रभारी को किए गए आखिरी फोन कॉल का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग।
- पूरे मामले की सीबीआई जांच और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।
निशा भगत के संघर्ष और मौत को लेकर सरकार से सवाल
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने बयान में कहा कि निशा भगत आदिवासी समाज के अधिकारों की बात करती थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उनका अपराध क्या था? उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछा कि जब निशा को खुद मदद की जरूरत थी, तब प्रशासन ने उनकी शिकायत पर क्या कार्रवाई की?
मरांडी ने कहा कि निशा दूसरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाती थीं, लेकिन जब उन्हें सहायता की जरूरत पड़ी तो प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब देने की मांग की।
कल्पना सोरेन की चुप्पी पर भी उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने विधायक कल्पना सोरेन को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कल्पना सोरेन सार्वजनिक मंचों से आदिवासी महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की बात करती हैं, लेकिन निशा भगत की मौत के मामले में उनकी चुप्पी सवाल खड़े करती है। मरांडी ने उनसे निशा के परिवार के सामने अपनी बात रखने और इस मामले पर प्रतिक्रिया देने की मांग की।
अजय तिर्की के बयान पर जताई नाराजगी
बाबूलाल मरांडी ने अजय तिर्की के उस कथित बयान पर भी सवाल उठाए, जिसमें उनके द्वारा निशा भगत को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानने और भाजपा पर मामले में राजनीति करने का आरोप लगाने की बात कही गई है।
मरांडी ने सवाल किया कि यदि अजय तिर्की निशा को निजी तौर पर नहीं जानते थे, तो सोशल मीडिया पर उनके निजी जीवन और चरित्र को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां किस आधार पर की गईं? उन्होंने मुख्यमंत्री और कल्पना सोरेन से भी पूछा कि इन आरोपों की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
हालांकि, इन आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सीबीआई जांच और थाना प्रभारी की भूमिका की जांच की मांग
बाबूलाल मरांडी ने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि निशा भगत ने अपनी मृत्यु से पहले जिस थाना प्रभारी को फोन किया था, उस कॉल का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाना चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि फोन पर निशा ने क्या शिकायत की थी और उसके बाद पुलिस ने क्या कदम उठाए।
उन्होंने अजय तिर्की और संबंधित थाना प्रभारी की भूमिका की निष्पक्ष जांच तथा आरोपों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की मांग की। मरांडी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है।
हेमंत सोरेन से इस्तीफे की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने जांच पूरी होने तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस्तीफा देने की मांग की है। उनका कहना है कि निशा भगत के परिवार को न्याय की लड़ाई में अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
अपने बयान के अंत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि निशा की मौत से जुड़े सवालों का जवाब मिलना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी दूसरी महिला को मदद के लिए पुलिस से गुहार लगानी पड़े तो उसकी शिकायत समय पर सुनी जाए। उन्होंने नारे के साथ अपनी मांग दोहराई— निशा भगत को न्याय दो, हेमंत हटाओ, राज्य बचाओ!
