शिक्षा सचिव से वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा की अहम वार्ता, कई मांगों पर मिला सकारात्मक आश्वासन
अनुदान, 75% वृद्धि और नई नियमावली समेत पांच प्रमुख मुद्दों पर हुई चर्चा
रांची। वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार, 16 जून 2026 को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के शिक्षा सचिव से मिला। इस दौरान मोर्चा ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े पांच महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। वार्ता सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई और शिक्षा सचिव ने कई बिंदुओं पर सकारात्मक पहल का भरोसा दिया।
223 संस्थाओं के लंबित अनुदान पर जल्द होगी समिति की बैठक
बैठक में मोर्चा ने सबसे पहले उन 223 संस्थाओं का मामला उठाया, जिनका अनुदान बंधक विलेख, उपयोगिता प्रमाण पत्र, शासी निकाय के पत्र अथवा अन्य कारणों से लंबित है। मोर्चा ने बताया कि संबंधित संस्थानों ने अपीलीय अभ्यावेदन के तहत अपनी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कर दी है, इसलिए अनुदान समिति की बैठक बुलाकर शीघ्र निर्णय लिया जाए।
इसके अलावा मोर्चा ने यह भी कहा कि हर वर्ष अंतिम समय में अनुदान वितरण होने से कई प्रकार की गड़बड़ियां सामने आती हैं और कई जिलों का अनुदान लैप्स हो जाता है। इस वर्ष भी तीन जिलों का अनुदान लैप्स हो चुका है। इसलिए अगस्त माह से ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दिसंबर तक अनुदान वितरण सुनिश्चित किया जाए।
इस सुझाव पर शिक्षा सचिव ने सहमति जताते हुए कहा कि यह एक व्यावहारिक और उपयोगी प्रस्ताव है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस वर्ष से नई व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया जाएगा तथा अनुदान समिति की बैठक जल्द बुलाई जाएगी।
75% अनुदान वृद्धि पर रिपोर्ट तलब करने की तैयारी
मोर्चा ने 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह मामला विधायक देवेंद्र कुमार द्वारा सदन में उठाया गया था, जिस पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदीप्त कुमार सोनू ने आश्वासन दिया था कि चालू वित्तीय वर्ष में ही बढ़ी हुई राशि का लाभ संस्थानों को दिया जाएगा।
इस पर शिक्षा सचिव ने कहा कि यह सदन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने बताया कि 9 फरवरी 2026 को जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जैक को भेजे गए पत्र के आलोक में आवश्यक जांच कर जल्द रिपोर्ट मांगी जाएगी, ताकि सरकार के आश्वासन का पालन सुनिश्चित हो सके।
नई नियमावली 2026 के कई प्रावधानों पर जताई आपत्ति
मोर्चा ने ‘उच्च विद्यालय सेकेंडरी (कक्षा 9 से 12) स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति शर्त एवं बंधेज नियमावली 2026’ के मसौदे में कई त्रुटियों और अव्यावहारिक प्रावधानों की ओर शिक्षा सचिव का ध्यान आकर्षित किया।
प्रतिनिधिमंडल ने सवाल उठाया कि जब सरकारी विद्यालयों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में एक एकड़ भूमि की शर्त है, तो वित्त रहित संस्थानों के लिए दो एकड़ भूमि की अनिवार्यता क्यों रखी गई है।
इसके साथ ही प्राचार्य कक्ष, शिक्षक सदन, छात्र कॉमन रूम, छात्रा कॉमन रूम के लिए 600-600 वर्ग फीट तथा प्रयोगशाला के लिए 1000-1000 वर्ग फीट क्षेत्रफल की अनिवार्यता को भी अव्यावहारिक बताया गया। मोर्चा का कहना था कि अधिकांश वित्त रहित संस्थानों के लिए इन शर्तों को पूरा करना कठिन होगा।
शिक्षा सचिव ने इन सुझावों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक संशोधन और व्यावहारिक समाधान का आश्वासन दिया।
सुरक्षा कोष और परिवाद पत्र व्यवस्था पर भी उठे सवाल
बैठक के दौरान मोर्चा ने सुरक्षा कोष (Security Fund) व्यवस्था पर भी आपत्ति दर्ज कराई। प्रतिनिधियों का कहना था कि अलग से सुरक्षा कोष लेने की आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय यह राशि संस्थानों के खाते में जमा रहे, ताकि उसके ब्याज का उपयोग संस्थान के विकास कार्यों में किया जा सके।
इसके अतिरिक्त मोर्चा ने परिवाद पत्रों के दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया। प्रतिनिधियों ने कहा कि कई शिकायतों में शिकायतकर्ता का पता और मोबाइल नंबर गलत होता है तथा जानबूझकर संस्थानों को परेशान करने का प्रयास किया जाता है।
इस पर शिक्षा सचिव ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और शिकायत गलत पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मोर्चा ने ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने की मांग भी रखी।
शिक्षक-कर्मचारियों के लिए सेवा शर्त नियमावली बनाने की मांग
मोर्चा ने वित्त रहित स्कूलों और कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारियों के लिए सेवा शर्त नियमावली तैयार करने की मांग भी उठाई। इस पर शिक्षा सचिव ने कहा कि वर्तमान में उठाए गए अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान के बाद इस विषय पर अलग से विचार किया जाएगा।
सकारात्मक माहौल में संपन्न हुई बैठक
वार्ता के दौरान शिक्षा सचिव ने मोर्चा के ज्ञापन पर तत्काल कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश भी दिए। बैठक में मोर्चा की ओर से रघुनाथ सिंह, डॉ. देवनाथ सिंह, गणेश महतो, मनीष कुमार और नरोत्तम सिंह उपस्थित थे।
कुल मिलाकर बैठक सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में संपन्न हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे की कार्रवाई का आश्वासन मिला।
