अल्बर्ट एक्का चौक पर GRAMG विधेयक के खिलाफ वाम दलों व मज़दूर संगठनों का जोरदार प्रदर्शन
रांची के अल्बर्ट एक्का चौक में वामपंथी दलों, शोधकर्ताओं और विभिन्न मज़दूर संगठनों ने संयुक्त रूप से केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 (GRAMG) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बिना मज़दूर संगठनों, किसान समूहों, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों से किसी भी तरह के परामर्श के यह विधेयक लाया गया है, जो अधिकार-आधारित क़ानून नरेगा को समाप्त कर उसे एक केंद्र-नियंत्रित और विवेकाधीन योजना में बदलने की कोशिश है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नया विधेयक मांग-आधारित रोज़गार के अधिकार को खत्म कर बजट-सीमित और आपूर्ति-आधारित व्यवस्था थोपता है। इससे ग्रामीण मज़दूरों की काम की गारंटी समाप्त होगी, राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा और ग्राम सभाओं की भूमिका कमजोर होगी। उनका कहना था कि इस बदलाव का सबसे गंभीर असर सीमांत किसानों, दलितों, आदिवासियों और महिला मज़दूरों पर पड़ेगा, जिनकी सौदेबाज़ी शक्ति पहले से ही कमजोर है।

वक्ताओं ने आशंका जताई कि काम की अनिश्चितता बढ़ने से ग्रामीण संकट और गहराएगा तथा मजबूरी में पलायन तेज़ होगा। उन्होंने इस विधेयक को “केंद्रीकृत और अलोकतांत्रिक” बताते हुए कहा कि यह “काम के अधिकार” को एक साधारण केंद्र प्रायोजित योजना में बदलने का प्रयास है, जो संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान GRAMG विधेयक की प्रति जलाकर आक्रोश जताया गया। “नरेगा तो बहाना है, मक़सद ग़ुलाम बनाना है”, “नया बिल रद्द करो, नरेगा बहाल करो” और “नरेगा बचाओ, देश बचाओ, संविधान बचाओ” जैसे नारों के साथ केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की गई।
इस प्रदर्शन में अपूर्वा, अशोक वर्मा, आशीष रौशन, एलिना होरो, चार्ल्स मुर्मू, छोटू राम महतो, जगर्नाथ उरांव, जसपाल हासदा, परदेसिया लकड़ा, मंटू मरांडी, मैरी निशा, मेवा लकड़ा, नंदिता, रमेश जी, रामेश्वर मलतो, रिया तूलिका पिंगुआ, त्रिलोकी, वीरेंद्र कुमार, समीर दास, सुखनाथ मुंडा, आर. एन. सिंह, टॉम, टोनी, विजय और विनोद शामिल रहे। वहीं झारखण्ड जनाधिकार महासभा, नरेगा वॉच, नरेगा संघर्ष मोर्चा और आइसा (AISA) सहित कई संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही।
