8 हफ्तों की गिरावट के बाद Sensex और Nifty में तेजी

Stock Market में लौटी रौनक! 8 हफ्ते बाद बाजार ने ली राहत की सांस

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8 हफ्तों की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी रौनक, Sensex-Nifty में उछाल; अब RBI पर नजर

रांची/नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 का कारोबारी सत्र काफी अहम रहा। लगातार आठ सप्ताह की गिरावट के बाद बाजार में शुरुआती कारोबार में खरीदारी लौटी और Sensex तथा Nifty दोनों में तेजी दिखाई दी। हालांकि, इस तेजी को अभी बाजार की दिशा में बड़ा बदलाव मानना जल्दबाजी होगी, क्योंकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की कीमत, बॉन्ड यील्ड और भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति जैसे कई बड़े फैक्टर बाजार पर असर डाल रहे हैं।

प्रमुख बातें

  • लगातार 8 सप्ताह की गिरावट के बाद बाजार में राहत की तेजी
  • शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 600 अंक तक चढ़ा
  • Nifty ने 22,500 के आसपास वापसी की
  • RBI की Monetary Policy Committee की बैठक शुरू, इस सप्ताह बड़ा फैसला संभव
  • HDFC Bank, Bajaj Finance और सरकारी बैंकों के शेयर चर्चा में
  • विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी बड़ी चिंता
  • कच्चे तेल और अमेरिकी ब्याज दरों के संकेत बाजार की दिशा तय करेंगे

आखिर बाजार में अचानक क्यों आई तेजी?

पिछले कई सप्ताह से भारतीय बाजार पर लगातार दबाव था। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, ऊंची क्रूड कीमत और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई थी। इसका असर इतना लंबा चला कि Sensex और Nifty ने लगातार आठ सप्ताह गिरावट दर्ज की, जो करीब 25 वर्षों में सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट की श्रृंखला बताई जा रही है।

लेकिन सोमवार को माहौल कुछ बदला हुआ नजर आया। अमेरिका से आए अपेक्षा से कमजोर रोजगार आंकड़ों ने वहां तत्काल आक्रामक ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंका को कुछ कम किया। इसका असर दुनिया के दूसरे बाजारों पर भी पड़ा और उभरते बाजारों को राहत मिली।

दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमत में नरमी ने भी भारतीय बाजार को सहारा दिया। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए क्रूड में राहत सीधे तौर पर महंगाई, व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव से जुड़ी होती है।

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Sensex और Nifty में जोरदार वापसी

सोमवार के शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty दोनों में अच्छी खरीदारी दिखाई दी। Reuters के अनुसार सुबह 10:06 बजे तक Nifty 50 करीब 0.56% बढ़कर 22,545.25 और Sensex 0.62% बढ़कर 72,359.72 पर पहुंच गया था।

इसके बाद भी बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा। इसका मतलब साफ है कि निवेशक पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं। बाजार में खरीदारी जरूर लौटी है, लेकिन हर तेजी के साथ मुनाफावसूली और बिकवाली का जोखिम भी बना हुआ है।

यानी फिलहाल बाजार की कहानी ‘गिरावट के बाद राहत’ की है, न कि निश्चित रूप से नई तेजी शुरू होने की।

बैंकिंग शेयरों ने संभाला मोर्चा

आज की तेजी में बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों की भूमिका खास रही। कई बैंकों के सितंबर तिमाही के कारोबारी अपडेट ने निवेशकों को सकारात्मक संकेत दिए हैं।

HDFC Bank के शेयरों में तेजी देखने को मिली। बैंक ने Anup Bagchi को अपना अगला MD और CEO नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब निवेशक बैंक के नेतृत्व परिवर्तन पर नजर बनाए हुए थे।

वहीं Punjab National Bank ने सितंबर तिमाही में अपने global advances में 14.8% की वृद्धि दर्ज की। Bank of Baroda के quarterly advances में करीब 18% की बढ़ोतरी हुई। इन कारोबारी आंकड़ों का असर बैंकिंग शेयरों के प्रदर्शन में भी दिखाई दिया।

 

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Bajaj Finance ने भी खींचा निवेशकों का ध्यान

Non-Banking Financial Company यानी NBFC सेक्टर से भी सकारात्मक संकेत आए हैं। Bajaj Finance के नए loans में सितंबर तिमाही के दौरान सालाना आधार पर करीब 11% की वृद्धि हुई। इसके अलावा कंपनी ने करीब ₹17,500 करोड़ की fundraising plan की जानकारी दी, जिसके बाद शेयर में शुरुआती कारोबार में लगभग 4% की तेजी देखी गई।

यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बाजार इस समय कंपनियों के वास्तविक कारोबार को लेकर ज्यादा संवेदनशील है। केवल उम्मीदों के आधार पर शेयरों में तेजी की गुंजाइश सीमित हो सकती है, जबकि मजबूत business updates निवेशकों को कुछ भरोसा देते हैं।

IT सेक्टर में भी हलचल

भारतीय IT कंपनियों के लिए भी सोमवार का दिन महत्वपूर्ण रहा। Accenture के बेहतर revenue growth और bookings के संकेतों का असर भारतीय IT stocks पर दिखाई दिया।

Reuters के मुताबिक Nifty IT index में करीब 1.1% की बढ़त दर्ज हुई। बाजार विशेषज्ञों ने Accenture के प्रदर्शन को भारतीय IT कंपनियों के लिए neutral-to-positive संकेत माना है।

इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे IT सेक्टर में तत्काल बड़ी तेजी आ जाएगी। लेकिन वैश्विक IT spending और technology demand को लेकर सकारात्मक संकेत भारतीय कंपनियों के लिए निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल—RBI क्या करेगा?

आज से शुरू हुई RBI Monetary Policy Committee की बैठक इस सप्ताह बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। ब्याज दर को लेकर RBI का फैसला बाजार की दिशा पर असर डाल सकता है।

Reuters के एक poll में economists के बीच इस बात की उम्मीद जताई गई है कि RBI लंबे अंतराल के बाद repo rate में 25 basis points की बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला RBI की MPC बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।

ब्याज दर में बदलाव का असर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव बैंक लोन, EMI, निवेश, बॉन्ड मार्केट और कंपनियों की borrowing cost तक पहुंचता है।

यही वजह है कि निवेशक RBI के संकेतों को केवल आज के बाजार भाव के लिए नहीं, बल्कि आने वाले महीनों की आर्थिक दिशा के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी चुनौती

बाजार की मौजूदा तेजी के बीच सबसे बड़ी चिंता विदेशी पूंजी का लगातार बाहर जाना है। हालिया सत्र में भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली जारी रही, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी के जरिए बाजार को सहारा दिया।

यही कारण है कि बाजार में घरेलू निवेशकों की खरीदारी के बावजूद स्थायी तेजी को लेकर अभी सावधानी बरती जा रही है।

अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है और कच्चा तेल फिर महंगा होता है, तो बाजार पर दोबारा दबाव बन सकता है।

आम निवेशक के लिए आज की सबसे बड़ी सीख

आज की तेजी देखकर जल्दबाजी में यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि बाजार ने अपनी दिशा पूरी तरह बदल ली है। लगातार आठ सप्ताह की गिरावट के बाद technical rebound आना स्वाभाविक भी हो सकता है।

दूसरी तरफ, अगर आने वाले दिनों में Nifty महत्वपूर्ण resistance levels के ऊपर टिकता है, विदेशी बिकवाली कम होती है, crude में नरमी रहती है और RBI का रुख बाजार के लिए अनुकूल रहता है, तो sentiment में और सुधार की गुंजाइश बन सकती है।

फिलहाल बाजार में उम्मीद लौटी है, लेकिन अनिश्चितता खत्म नहीं हुई है।

यही वजह है कि 5 अक्टूबर 2026 के कारोबारी सत्र को केवल ‘बाजार चढ़ा’ वाली खबर के रूप में देखना अधूरा होगा। असली तस्वीर RBI policy, विदेशी निवेश, crude oil, रुपये और कंपनियों के quarterly business updates से मिलकर बनेगी।

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