कच्चे तेल की तेजी से शेयर बाजार में हड़कंप! जानिए आपकी जेब पर क्या असर होगा
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। मंगलवार, 29 सितंबर को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे और करीब छह महीने के निचले स्तर के आसपास पहुंच गए। बाजार में इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता बताई जा रही है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश के आयात बिल, महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि मंगलवार के कारोबार में निवेशकों के बीच सतर्कता देखने को मिली।
प्रमुख बातें
- सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में करीब 6 महीने के निचले स्तर के पास पहुंचे।
- निफ्टी 50 में करीब 0.77 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
- सेंसेक्स करीब 0.82 फीसदी नीचे आया।
- ब्रेंट क्रूड करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा।
- बैंकिंग, आईटी और वित्तीय शेयरों में भी दबाव दिखा।
- सोमवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से ₹5,353 करोड़ से ज्यादा की निकासी की।
- घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹5,189 करोड़ की खरीदारी की।
तेल की कीमत बढ़ी तो भारत पर क्यों पड़ता है असर?
भारत दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। इसलिए जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो भारतीय कंपनियों और अर्थव्यवस्था पर कई स्तरों पर असर पड़ सकता है।
सबसे पहले देश का इंपोर्ट बिल बढ़ता है। यानी समान मात्रा में तेल खरीदने के लिए भारत को ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। इसका असर व्यापार घाटे और चालू खाते पर पड़ सकता है।
NSE Share में तेजी के बाद गिरावट, अब सोमवार के कारोबार पर नजर
दूसरी तरफ, महंगा कच्चा तेल परिवहन और उत्पादन लागत को प्रभावित कर सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव का असर ट्रांसपोर्टेशन से लेकर सामान की ढुलाई तक दिखाई दे सकता है। इसके बाद कंपनियों की लागत बढ़ने पर उनके मुनाफे पर दबाव आने की संभावना रहती है।
यही कारण है कि कच्चे तेल की तेजी को शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। Reuters के अनुसार मंगलवार को ब्रेंट क्रूड लगभग 1.5 फीसदी बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था।
सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट?
मंगलवार सुबह करीब 9:50 बजे तक Nifty 50 करीब 0.77 फीसदी गिरकर 22,606.1 अंक पर था, जबकि BSE Sensex 0.82 फीसदी गिरकर 72,179.87 अंक पर पहुंच गया था। दोनों प्रमुख सूचकांक शुरुआती कारोबार में अप्रैल के बाद के निचले स्तरों के करीब पहुंच गए।
इससे एक दिन पहले सोमवार को भी भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली थी। Sensex करीब 1,124 अंक गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ था, जबकि Nifty 50 में करीब 1.6 फीसदी की गिरावट आई और यह 22,780.25 पर बंद हुआ।
यानी लगातार दूसरे कारोबारी दिन बाजार पर दबाव बना रहा।
UPI पर चार्ज से बचने का तरीका? ₹2,000 के कई पेमेंट का विकल्प चर्चा में
सिर्फ तेल नहीं, कई वजहों से दबाव में बाजार
शेयर बाजार में गिरावट को केवल कच्चे तेल की तेजी से जोड़ना पूरी तस्वीर नहीं होगी। वैश्विक बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी बाजार से जुड़े संकेत, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे कई कारक एक साथ बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं।
Reuters के मुताबिक मंगलवार को 16 प्रमुख सेक्टर इंडेक्स में से 14 में गिरावट थी। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भी कमजोरी रही। IT इंडेक्स भी करीब 1 फीसदी नीचे था।
बड़े शेयरों में Tata Motors करीब 3 फीसदी, Tata Investment करीब 2.5 फीसदी और HDFC Bank करीब 1.6 फीसदी नीचे था। ICICI Bank में करीब 1 फीसदी और Reliance Industries में करीब 0.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाई चिंता
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि भी इस समय महत्वपूर्ण है। सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में ₹5,353.22 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की। यह सितंबर में उनका एक दिन का सबसे बड़ा आउटफ्लो बताया गया है।
इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने ₹5,189.02 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। इसका मतलब यह है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में गिरावट के दौरान खरीदारी की, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव भी काफी बड़ा रहा।
बैंकिंग शेयरों पर भी दबाव
बाजार में बैंकिंग शेयरों की स्थिति भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है। मंगलवार को Nifty Bank में दो दिनों के दौरान करीब 1,800 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और इंडेक्स 54,000 के स्तर से नीचे चला गया। यह जून की शुरुआत के बाद पहली बार इस स्तर से नीचे आने की रिपोर्ट है।
बैंकिंग शेयरों पर दबाव की वजह केवल बाजार की सामान्य गिरावट नहीं है। ऊंची महंगाई की आशंका और ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें भी बैंकिंग शेयरों की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं।
महंगाई बढ़ी तो आम आदमी पर क्या असर?
अब सबसे बड़ा सवाल है कि शेयर बाजार की यह हलचल आम लोगों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है?
दरअसल, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी रहने पर इसका असर सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहता। महंगा तेल परिवहन लागत बढ़ा सकता है। इससे माल ढुलाई महंगी हो सकती है और कई वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बन सकता है।
इसके अलावा विमानन, पेंट, केमिकल, टायर, लॉजिस्टिक्स और कई अन्य उद्योगों की लागत पर भी कच्चे तेल की कीमतों का असर पड़ सकता है। सोमवार को बाजार से जुड़ी एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरण कंपनियां बढ़ती इनपुट लागत के कारण अक्टूबर से कीमतों में 5-8 फीसदी तक बढ़ोतरी कर सकती हैं। हालांकि यह कंपनियों के स्तर पर संभावित मूल्य वृद्धि है, इसे पूरे बाजार या सभी उत्पादों पर लागू नहीं माना जाना चाहिए।
कुछ कंपनियों को मिल रही राहत भी
गिरते बाजार में भी सभी शेयरों में गिरावट नहीं रही। मंगलवार के शुरुआती कारोबार में निर्माण क्षेत्र की कंपनी NCC करीब 2.7 फीसदी ऊपर थी। कंपनी को ₹1,077 करोड़ का ऑर्डर मिलने की जानकारी सामने आई।
इसी तरह औद्योगिक गैस बनाने वाली कंपनी Ellenbarrie के शेयर में करीब 3 फीसदी की तेजी देखी गई। कंपनी को BHEL से ₹481 करोड़ का ऑर्डर मिलने की खबर के बाद शेयर में खरीदारी देखने को मिली।
इससे एक बात साफ होती है कि बाजार में व्यापक गिरावट के बावजूद जिन कंपनियों को बड़े ऑर्डर, मजबूत कारोबारी अपडेट या सकारात्मक कॉरपोरेट खबरें मिलती हैं, उनके शेयरों का प्रदर्शन अलग हो सकता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा?
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमत, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और RBI की मौद्रिक नीति पर रहेगी।
बाजार में ब्याज दरों को लेकर भी चर्चा तेज है। कुछ बाजार विशेषज्ञों ने अक्टूबर की RBI बैठक में दरों को लेकर अलग-अलग संभावनाएं जताई हैं, लेकिन यह भविष्य का अनुमान है और इसे RBI के निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
निष्कर्ष
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय शेयर बाजार की चिंता बढ़ा दी है। सेंसेक्स और निफ्टी लगातार दबाव में हैं, विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है और बैंकिंग समेत कई बड़े सेक्टर कमजोर दिख रहे हैं। हालांकि दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और कुछ कंपनियों को मिले बड़े ऑर्डर यह बताते हैं कि बाजार में हर शेयर पर एक जैसा असर नहीं पड़ रहा।
आम निवेशक के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बाजार की एक-दो दिन की गिरावट को देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनी के कारोबार, वैल्यूएशन, जोखिम और अपनी निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है। बाजार में आगे की दिशा कच्चे तेल और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम समेत कई कारकों पर निर्भर करेगी।
डिस्क्लेमर: यह खबर बाजार की मौजूदा गतिविधियों और उपलब्ध रिपोर्टों की जानकारी पर आधारित है। इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
