चंपाई सोरेन का झारखंड सरकार पर खनिज सेस को लेकर हमला

चंपाई सोरेन ने हेमंत सोरेन सरकार से पूछा- कोयला इतना महंगा क्यों?

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चंपाई सोरेन का सरकार पर बड़ा हमला, बोले- ‘झारखंड को अवैध धंधों का अड्डा बनाने की कोशिश का होगा पुरजोर विरोध’

पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा विधायक चंपाई सोरेन ने झारखंड में खनिजों पर लगाए जा रहे सेस को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीति की वजह से झारखंड का कोयला पड़ोसी राज्यों की तुलना में महंगा हो रहा है, जिसका सीधा नुकसान खनन उद्योग और राज्य की जनता को हो रहा है।

प्रमुख बातें

  • चंपाई सोरेन ने झारखंड में खनिजों पर लगाए जा रहे सेस पर सवाल उठाया।
  • थर्मल कोयले की कीमत को लेकर झारखंड की तुलना पश्चिम बंगाल और ओडिशा से की।
  • आरोप लगाया कि अधिक सेस के कारण ग्राहक पड़ोसी राज्यों से सस्ता कोयला खरीद सकते हैं।
  • सरकार पर अवैध कोयला कारोबार को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया।
  • पिछले दो वर्षों में वसूले गए सेस के इस्तेमाल को लेकर सरकार से सवाल किया।
  • बंद हो रही खदानों और रोजगार के नुकसान का मुद्दा उठाया।
  • नए खदान शुरू कर राज्य का राजस्व बढ़ाने की मांग की।
  • चंपाई सोरेन ने कहा कि झारखंड को अवैध कारोबार का अड्डा बनाने की हर कोशिश का विरोध होगा।

झारखंड में महंगा कोयला क्यों? चंपाई ने उठाया सवाल

चंपाई सोरेन ने कहा कि झारखंड में कोयला और लौह अयस्क जैसे खनिजों की कीमतें पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी अधिक हैं। उन्होंने इसके पीछे राज्य सरकार की ओर से लगाए जा रहे सेस को मुख्य कारण बताया।

उन्होंने थर्मल कोयले की कीमत का उदाहरण देते हुए कहा कि जी-11 श्रेणी का कोयला झारखंड में करीब 2,458 रुपये प्रति टन है, जबकि पश्चिम बंगाल में इसकी कीमत करीब 1,741 रुपये और ओडिशा में 1,708 रुपये प्रति टन बताई गई है।

चंपाई सोरेन के मुताबिक, ऐसी स्थिति में ग्राहक झारखंड की बजाय पड़ोसी राज्यों से कोयला खरीदना पसंद करेगा, क्योंकि उसे प्रति टन करीब 700 से 750 रुपये तक की बचत हो सकती है।

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‘टैक्स-सेस से ज्यादा सरकार की नीयत का सवाल’

भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि जब कोयला खनन में लगी कंपनियों की कीमतें लगभग समान हैं, तो कीमतों में अंतर मुख्य रूप से टैक्स और सेस की वजह से पैदा हो रहा है।

उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने देश और कई राज्यों में लंबे समय तक शासन किया है और उसे इन विषयों की जानकारी है। इसके बावजूद झारखंड में अत्यधिक सेस लगाया जा रहा है।

‘अवैध कारोबार को बढ़ावा देने की कोशिश’

चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिक सेस के कारण ग्राहक खनन कंपनियों से कोयला खरीदने के बजाय कथित अवैध कारोबारियों से खरीदने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

उन्होंने दावा किया कि अवैध कारोबार होने पर राज्य सरकार को रॉयल्टी, जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट, राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट और वस्तु एवं सेवा कर जैसे राजस्व का नुकसान होगा।

चंपाई ने आरोप लगाया कि ऐसी स्थिति में केवल सत्ता से जुड़े लोगों के कथित अवैध कारोबार को फायदा होगा।

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खनिज कानून को लेकर भी सरकार पर निशाना

चंपाई सोरेन ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने खनिज क्षेत्र में अवैध कारोबार पर रोक लगाने के उद्देश्य से खनिज और खनिज विकास एवं विनियमन कानून में संशोधन के जरिए कदम उठाया, तब इसे झारखंड के अधिकारों पर हमला बताकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की गई।

उन्होंने कहा कि आदिवासी और मूलवासी समाज के हितों के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

‘सेस के हजारों करोड़ से क्या किया?’

पूर्व मुख्यमंत्री ने पिछले दो वर्षों में वसूले गए सेस के इस्तेमाल को लेकर राज्य सरकार से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि हजारों करोड़ रुपये सेस के रूप में वसूलने के बावजूद क्या एक भी गांव को प्रदूषण और विस्थापन की समस्या से निपटने के लिए तैयार किया गया?

उन्होंने कहा कि इस राशि से सैकड़ों स्मार्ट गांव विकसित किए जा सकते थे। चंपाई ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता विकास के बजाय राज्य के प्राकृतिक संसाधनों से राजस्व वसूलना है।

‘नए खदान शुरू कर बढ़ाया जा सकता है राजस्व’

चंपाई सोरेन ने कहा कि यदि राज्य सरकार को राजस्व की जरूरत है, तो ओडिशा की तर्ज पर नए खदान शुरू किए जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि रॉयल्टी और नीलामी प्रीमियम के जरिए राज्य सरकार हजारों करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर सकती है।

उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार की ओर से कई खदानों को मंजूरी दिए जाने के बावजूद उन्हें शुरू क्यों नहीं किया जा रहा है।

‘स्थानीय खनन कंपनियों को भारी नुकसान’

चंपाई सोरेन ने दावा किया कि राज्य सरकार की मौजूदा नीति के कारण स्थानीय खनन कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि कई खदानें बंद हो चुकी हैं और बड़ी संख्या में लोगों के रोजगार पर संकट पैदा हो रहा है।

उन्होंने कहा कि इसका अंतिम नुकसान झारखंड के लोगों को ही उठाना पड़ेगा।

‘सड़क से सदन तक होगा विरोध’

चंपाई सोरेन ने चेतावनी देते हुए कहा कि झारखंड को अवैध कारोबार का अड्डा बनाने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राज्य की जनता सड़क से लेकर सदन तक सरकार के खिलाफ खड़ी होगी और सरकार की नीतियों की वास्तविकता आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाई जाएगी।

चंपाई ने कहा कि झारखंड आंदोलन के दौरान आदिवासी, मूलवासी और विकास से दूर खड़े आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का सपना देखा गया था। उनके मुताबिक, ऐसे कर और सेस राज्य के विकास में बाधा बनते दिखाई दे रहे हैं।

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