JTET भाषा विवाद को लेकर झारखंड सरकार की हाई लेवल बैठक का प्रतीकात्मक दृश्य

JTET में भाषा विवाद पर हाई लेवल बैठक आज. अभ्यर्थियों की नजर.

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JTET Language Controversy: मगही, भोजपुरी और अंगिका पर आज होगी हाई लेवल बैठक

रांचीः झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर छिड़ा विवाद अब हाई लेवल स्तर तक पहुंच गया है। मगही, भोजपुरी और अंगिका को क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में शामिल करने को लेकर आज मंत्रियों की कमेटी की अहम बैठक होने जा रही है। यह बैठक मंत्रिपरिषद कक्ष में आयोजित होगी, जिसमें कई मंत्री और विभागीय अधिकारी शामिल होंगे।

प्रमुख बातें

  • JTET में क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर सोमवार को हाई लेवल बैठक
  • मगही, भोजपुरी और अंगिका को शामिल करने पर होगा मंथन
  • 2012 की नियमावली पर सरकार मांगेगी जवाब
  • नई नियमावली से भाषाओं को बाहर करने का कारण पूछा जाएगा
  • कार्मिक विभाग से जिलावार भाषा आबादी की रिपोर्ट तलब

किन मंत्रियों की बनी है कमेटी?

इस मामले को लेकर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के संयोजन में एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है। कमेटी में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, सुदिव्य कुमार, योगेंद्र प्रसाद और संजय प्रसाद यादव शामिल हैं। इसके अलावा कार्मिक विभाग और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहेंगे।

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2012 की नियमावली पर उठे सवाल

बैठक में सबसे बड़ा सवाल यह रहेगा कि वर्ष 2012 की JTET नियमावली में मगही, भोजपुरी और अंगिका को किस आधार पर क्षेत्रीय भाषा सूची में शामिल किया गया था। मंत्रियों की कमेटी विभागीय अधिकारियों से इस संबंध में सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगेगी।

इसके साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि इस वर्ष लागू नई नियमावली में इन भाषाओं को जगह क्यों नहीं दी गई। सरकार इस पूरे विवाद की प्रशासनिक और कानूनी स्थिति स्पष्ट करना चाहती है।

कार्मिक विभाग से मांगी गई रिपोर्ट

दूसरी तरफ, कार्मिक विभाग को भाषा आधारित जिलावार आबादी का डेटा उपलब्ध कराने को कहा गया है। माना जा रहा है कि सरकार यह जानना चाहती है कि किन जिलों में इन भाषाओं को बोलने वाले लोगों की संख्या कितनी है और क्या इन्हें क्षेत्रीय भाषा का दर्जा देने का आधार बन सकता है।

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कैबिनेट बैठक में भी उठा था मुद्दा

सूत्रों के अनुसार जब नई नियमावली को मंजूरी के लिए कैबिनेट बैठक में लाया गया था, तब मंत्री राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय सिंह ने इन तीनों भाषाओं को सूची में शामिल करने की मांग उठाई थी। इसके बाद सरकार ने मामले की समीक्षा के लिए हाई लेवल कमेटी गठित कर दी।

हालांकि, कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद नई नियमावली अधिसूचित हो चुकी है। ऐसे में अब सभी की नजर सोमवार की बैठक पर टिकी हुई है।

छात्रों और अभ्यर्थियों की नजर बैठक पर

JTET की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई छात्र संगठन लगातार इन भाषाओं को शामिल करने की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ संगठन इसका विरोध भी कर रहे हैं। ऐसे में सोमवार की बैठक का फैसला आगे की दिशा तय कर सकता है।

क्या हो सकता है बड़ा फैसला?

राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच सरकार इस मुद्दे पर कोई बड़ा निर्णय ले सकती है। अगर कमेटी सहमत होती है, तो भविष्य में नियमावली में संशोधन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

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