मुख्य बिंदु-
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राज्य सरकार ने अब तक धान खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं की
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किसान बिचौलियों को 14–15 रु/किलो पर बेचने को मजबूर
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किसानों में निराशा और सरकार की नीयत पर सवाल
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बाबूलाल मरांडी ने देरी को लेकर उठाए गंभीर सवाल
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सभी जिलों में तत्काल क्रय केंद्र खोलने की मांग
धान की फसल तैयार, लेकिन खरीद प्रक्रिया लंबित
रांची- झारखंड में इस बार धान की फसल समय पर पक चुकी है, किसान अपने अनाज को बेचने की तैयारी में हैं, लेकिन राज्य सरकार अब तक खरीदारी प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाई है। इस देरी ने किसानों को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि समय पर खरीद केंद्र नहीं खुलने से वे अपनी उपज बाजार में उचित मूल्य पर नहीं बेच पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि हर साल तय समय पर खरीद शुरू होती है, लेकिन इस बार असामान्य देरी से उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है।
बिचौलियों ने बढ़ाई किसानों की मुश्किल
खरीद प्रक्रिया में देरी के कारण किसान मजबूरी में अपनी उपज बिचौलियों को मात्र 14–15 रुपये प्रति किलो की बेहद कम कीमत पर बेच रहे हैं। यह दर न सिर्फ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी कम है, बल्कि किसानों के मेहनत, लागत और पूरे सीज़न की तैयारी के बिल्कुल विपरीत है। खेतों में महीनों की मेहनत के बाद फसल कटने पर किसान ज्यादा इंतजार नहीं कर सकते, इसी मजबूरी का लाभ बिचौलिये उठा रहे हैं।
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सरकार की नीयत पर सवाल, मरांडी का बड़ा बयान
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने धान खरीद में हो रही देरी को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि खरीदारी शुरू न होने से किसान औने–पौने दाम पर फसल बेचने को विवश हैं और यह स्थिति सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार की ढिलाई के कारण बिचौलियों का बोलबाला बढ़ गया है और इसका सीधा नुकसान किसानों को झेलना पड़ रहा है।
“किसानों की मेहनत का उचित मूल्य मिले” — मरांडी
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को टैग करते हुए कहा कि किसानों की मेहनत का उचित मूल्य मिलना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार तुरंत सभी जिलों में धान क्रय केंद्र शुरू करे और बिचौलियों पर कड़ी कार्रवाई करे। मरांडी ने यह भी कहा कि यदि खरीद प्रक्रिया और देर से शुरू हुई, तो किसानों की आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा।
किसानों में बढ़ रही बेचैनी, सरकार से तत्काल कदम की उम्मीद
इस पूरे मुद्दे ने ग्रामीण क्षेत्रों में बेचैनी बढ़ा दी है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार तुरंत हस्तक्षेप करे और खरीद प्रक्रिया को समय पर पटरी पर लाए। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खरीद में देरी जारी रही, तो न केवल किसानों को नुकसान होगा, बल्कि धान उत्पादन से जुड़े अन्य व्यापार भी प्रभावित होंगे।
