झारखंड में 4 हजार आउटसोर्स कर्मियों पर संकट! 5 महीने से वेतन नहीं, परिवारों पर भुखमरी का खतरा
बड़ी बातें
- झारखंड के 3-4 हजार आउटसोर्स कर्मियों का वेतन 5 महीने से लंबित
- JAP-IT और आउटसोर्स एजेंसियों का अनुबंध 31 मार्च 2026 को खत्म
- नई टेंडर प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं
- कर्मियों के सामने आर्थिक संकट और भुखमरी जैसी स्थिति
- सरकार और JAP-IT प्रबंधन से जल्द समाधान की मांग
झारखंड में आउटसोर्स कर्मियों की हालत गंभीर
रांची– झारखंड के विभिन्न विभागों और सरकारी कार्यालयों में कार्यरत लगभग 3 से 4 हजार आउटसोर्स कर्मियों की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। JAP-IT रांची और आउटसोर्स एजेंसियों के बीच हुआ सेवा अनुबंध 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुका है, लेकिन अब तक न तो अनुबंध का विस्तार किया गया है और न ही नई निविदा प्रक्रिया पूरी की गई है।
इस प्रशासनिक देरी का सीधा असर हजारों कर्मचारियों पर पड़ा है, जो वर्षों से सरकारी कार्यों को संभाल रहे हैं।
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जनवरी 2026 से नहीं मिला वेतन
जानकारी के अनुसार आवंटन के अभाव में जनवरी 2026 से सभी आउटसोर्स कर्मियों का वेतन लंबित है। लगातार 4 से 5 महीनों से बिना वेतन काम करने को मजबूर कर्मचारी अब आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे हैं।
कई कर्मियों ने बताया कि घरों में राशन की समस्या खड़ी हो गई है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, इलाज रुक गया है और बैंक लोन तथा किराया चुकाना मुश्किल हो गया है।
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हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी प्रक्रिया अधूरी
Jharkhand High Court के निर्देश पर मुख्य सचिव की अगुवाई में “Jharkhand Manpower Procurement (Outsourcing) Manual 2025” तैयार किया गया था। इसके लिए वित्त विभाग ने 3 जून 2025 को संकल्प भी जारी किया था।
लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी नई टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया गया है, जिससे हजारों कर्मियों के सामने असुरक्षा की स्थिति बनी हुई है।
डिजिटल झारखंड चलाने वाले कर्मी खुद परेशान
कर्मियों का कहना है कि डिजिटल झारखंड और ई-गवर्नेंस जैसी योजनाओं को धरातल पर लागू करने में उनकी बड़ी भूमिका है। इसके बावजूद उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
बिना वेतन के भी कर्मचारी सरकारी कार्यों को पूरी जिम्मेदारी से निभा रहे हैं।
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कर्मियों की सरकार से 4 बड़ी मांगें
आउटसोर्स कर्मियों ने सरकार और JAP-IT प्रबंधन से मांग की है कि—
- लंबित सेवा अनुबंध का तुरंत समाधान किया जाए।
- नई निविदा प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए।
- जनवरी 2026 से लंबित वेतन का भुगतान किया जाए।
- भविष्य में वेतन और नौकरी की असुरक्षा खत्म करने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
जल्द समाधान नहीं हुआ तो बढ़ सकता है संकट
कर्मियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो हजारों परिवारों के सामने गंभीर जीवन संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि अपने मेहनत के बदले समय पर वेतन चाहते हैं।
