आदिवासी अधिकारों को लेकर नए मोर्चे का गठन, परिसीमन के मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी
रांची, 3 अक्टूबर 2026: आदिवासी समाज के संवैधानिक, लोकतांत्रिक, सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर ‘आदिवासी लोकतांत्रिक अधिकार मोर्चा’ की राज्यस्तरीय कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया है। मोर्चा की बैठक बंधु तिर्की की अध्यक्षता में हुई, जिसमें संगठन विस्तार, परिसीमन, पांचवीं अनुसूची और आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक में शशि पन्ना और लक्ष्मीनारायण मुंडा को मुख्य प्रवक्ता बनाया गया। मोर्चा के अनुसार, संगठन को राज्य के सभी जिलों और प्रखंडों तक विस्तार देने के साथ ग्राम एवं पंचायत स्तर पर भी सक्रिय किया जाएगा।
प्रमुख बातें
- आदिवासी लोकतांत्रिक अधिकार मोर्चा की राज्यस्तरीय कार्यकारिणी गठित
- शशि पन्ना और लक्ष्मीनारायण मुंडा बनाए गए मुख्य प्रवक्ता
- परिसीमन के संभावित प्रभावों को लेकर जनजागरूकता अभियान की तैयारी
- पांचवीं अनुसूची और आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर फोकस
- भूमि, जल-जंगल-जमीन, भाषा और संस्कृति से जुड़े मुद्दे उठाने की बात
- दशहरा के बाद जिलावार बैठकों का कार्यक्रम प्रस्तावित
परिसीमन के मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी
बैठक में प्रस्तावित परिसीमन को आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय बताया गया। मोर्चा के अनुसार, परिसीमन के संभावित प्रभावों को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
मोर्चा ने पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की संवैधानिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाने की बात कही है। साथ ही इन मुद्दों पर आवश्यक संवैधानिक पहल की मांग को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

जिलों और प्रखंडों तक संगठन विस्तार की योजना
बैठक में संगठन को राज्य के सभी जिलों और प्रखंडों तक मजबूत करने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही परिसीमन, पांचवीं अनुसूची, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, भूमि, जल-जंगल-जमीन, भाषा, संस्कृति और अन्य संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर जनसंपर्क अभियान चलाने की बात कही गई।
मोर्चा के अनुसार, संगठन की गतिविधियों को ग्राम और पंचायत स्तर तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जाएगा।
दशहरा के बाद जिलावार बैठकें
बैठक में तय किया गया कि दशहरा के बाद राज्य के विभिन्न जिलों में जिलावार बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में संगठन को ग्राम और प्रखंड स्तर तक मजबूत करने के साथ परिसीमन तथा अन्य आदिवासी मुद्दों पर जनजागरूकता बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा होगी।
इन्हीं बैठकों के दौरान आगामी लोकतांत्रिक कार्यक्रमों और आंदोलनों की रूपरेखा तैयार किए जाने की बात कही गई है।
राज्यस्तरीय कार्यकारिणी में कई जिलों के प्रतिनिधि
नई कार्यकारिणी में रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, हजारीबाग, चतरा, रामगढ़, गढ़वा, पलामू, लातेहार, चाईबासा, जमशेदपुर, सरायकेला-खरसावां, बोकारो, दुमका, जामताड़ा, देवघर, पाकुड़ और गिरिडीह समेत विभिन्न जिलों के सदस्यों को शामिल किया गया है।
रांची से दयामनी बारला, रमा खलखो, लक्ष्मीनारायण मुंडा, अजय तिर्की, शशि पन्ना, ज्योत्सना केरकेट्टा, वासवी किड़ो, आलोक कुजूर, नीरज भोगता, अनिल अमिताभ पन्ना, शिव कच्छप और अनिल उरांव सहित अन्य जिलों के प्रतिनिधियों को कार्यकारिणी में जगह दी गई है।
संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन की बात
मोर्चा ने कहा है कि आदिवासी समाज की एकता, संवैधानिक अधिकारों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, भाषा, संस्कृति और पहचान से जुड़े सवालों को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से उठाया जाएगा। संगठन का दावा है कि आने वाले दिनों में इन मुद्दों को लेकर जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों को और विस्तार दिया जाएगा।
